राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने चेतावनी दी है कि इस मामले में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राजधानी में जल निकायों पर अतिक्रमण और उनके पुनर्जीवन में देरी पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने नमभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) के प्रबंध निदेशक और जिला मजिस्ट्रेट पश्चिम को 3 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इन अधिकारियों को जल निकायों की पहचान, अतिक्रमण हटाने और उनके पुनर्जीवन के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अधिकरण ने चेतावनी दी है कि इस मामले में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान नमभूमि प्राधिकरण की तरफ से 30 अक्तूबर, 2024 को जारी आदेशों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। यह मामला 29 अप्रैल 2022 से लंबित है, जो एनजीटी अधिनियम की धारा 18(3) के तहत निर्धारित 6 महीने की समय सीमा का उल्लंघन है। डॉ. जीत सिंह यादव की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों को अपुष्ट, अस्पष्ट और मामले को टालने की कोशिश करार दिया।