पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की अवमानना करने के मामले में जिला प्रशासन ने शनिवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी एक, दो और जमीन अधिग्रहण अधिकारी के कार्यालयों को सील कर दिया। प्रशासन ने इसकी चाबी जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंप दी है। हाईकोर्ट के आदेश पर भी याचिकाकर्ताओं की जमीन का मुआवजा एचएसवीपी ने जारी नहीं किया। इस पर हाईकोर्ट को इसके लिए आदेश देना पड़ा। ऐसे में सोमवार को एचएसवीपी के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। एचएसवीपी को पीड़ित किसानों को करीब साढ़े छह करोड़ रुपये देने हैँ।
याचिकाकर्ता मनोज कुमार व अन्य किसानों ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था। पीड़ितों के वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि एचएसवीपी ने नरसिंहपुर कासन गांव में कई किसानों की 16 कनाल और 6 मरला जमीन का अधिग्रहण किया था। बाद में इस भूमि के साथ 4 कनाल 15 मरला भूमि का और कब्जा ले लिया गया। इसके लिए किसानों को कोई भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद किसान हाईकोर्ट चले गए और न्याय की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने अप्रैल में याचिका का निपटारा करते हुए चार माह के भीतर संबंधित किसानों को मुआवजा जारी करने का आदेश दिया था। पैसे नहीं मिलने पर किसान दोबारा हाईकोर्ट पहुंचे और अधिकारियों की मनमानी करने का मामला उठाया। कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई।
दो बार आदेश देने के बाद भी नहीं दिया मुआवजा
अवमानना याचिका में भी दो बार मौका देने के बावजूद मुआवजा जारी नहीं किया गया और शुक्रवार को फिर से मोहलत मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह सीधे तौर पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला बनता है। याचिकाकर्ताओं की जमीन का एचएसवीपी 13 साल से इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
वकील ने बताया कि हाई कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर व उपायुक्त को आदेश दिया था कि वे लैंड एक्विजिशन कलेक्टर व संबंधित संपदा अधिकारी के कार्यालय सील कर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को चाबी सौंप दें। इस पर शुक्रवार की शाम एलएसी सेक्टर 14, ईओ वन सेक्टर 14 तथा ईओ टू सेक्टर 34 के कार्यालय को सील किया गया। स्टाफ की छुट्टी होने के बाद दफ्तरों की सील कर दिया। जिसमें तत्कालीन अधिकारी लवीना, विकास ढांडा, राजेंद्र सिंह बैठते हैं।