केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो दिल्ली के अधिकारियों ने उपराज्यपाल के आदेशों की अनदेखी शुरू कर दी।
अधिकारियों के फील्ड निरीक्षण, दिन में दो घंटे जन सुनवाई के बाद अब राष्ट्रपति शासन के 100 दिन की उपलब्धि मांगने को लेकर भी दो सर्कुलर जारी करने पड़े हैं।
राष्ट्रपति शासन के दौरान किए गए कार्यों की बुकलेट छपवाने के लिए सभी विभागों से सूचनाएं मांगी गईं थीं।
केजरी सरकार के फैसले से भी किनारा
उपराज्यपाल नजीब जंग ने सभी विभागों की दो अलग-अलग समीक्षा बैठक में विभाग प्रमुखों से कहा था कि जहां पब्लिक डीलिंग कार्यालय हैं, वहां निरीक्षण करके सुधार करें।
जो कमियां दिखें उसे दूर कराएं और राजनिवास को इसकी रिपोर्ट भी भेजें। विभाग ने रुचि कम ली तो मुख्य सचिव की तरफ से दूसरी बार सर्कुलर जारी करके विभागों के मुखिया से कहा गया कि रिपोर्ट भेजें।
उपराज्यपाल का दूसरा आदेश था कि आम आदमी पार्टी की सरकार के समय जिस तरह से जनता दरबार लगाने के आदेश दिए गए थे, उसी तरह सीधे पब्लिक से मिलें। दिन में 11 बजे से 1 बजे तक दरवाजे खुले रखें और जनता की समस्याएं सुनें। इस पर कोई पालन नहीं हुआ।
AAP ने बिगाड़ा काम!
नजीब जंग का तीसरा आदेश राष्ट्रपति शासन में 100 दिन में किए गए कार्यों को बताने से संबंधित है। 27 मई को राष्ट्रपति शासन के 100 दिन पूरे हो गए। सर्कुलर उससे पहले ही जारी किए गए थे लेकिन अभी तक सभी विभागों ने जानकारी नहीं दी है।
अधिकारी खुलकर तो नहीं लेकिन यह कह रहे हैं कि ज्यादा समय आचार संहिता लागू रही जिसके कारण काम नहीं हो सके। उपलब्धि न के बराबर है तो फिर क्या दें।
भाजपा विधायक नरेश गौड़ ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार छोड़कर भागी। यमुनापार विकास बोर्ड खत्म करने के अलावा तमाम पुराने फंड व काम रोक दिए गए।फिर राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। जनता नहीं समझ पा रही है कि किससे मिलें। दिल्ली पिछड़ रही है।