प्रशासन व जिले के पत्रकारों के बीच बृहस्पतिवार को सचिवालय में चल रही बैठक में उस समय अजीबो गरीब स्थिति पैदा हो गई, जब बिजली बोर्ड से संबंधित एलईडी लाइटों के संबंध में पूछे गए एक सवाल का ठीक से जवाब न देने पर उपायुक्त ने बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता को जमकर हड़काया तथा बैठक से बाहर निकाल दिया।
उपायुक्त के इस सख्त रवैये को देख अन्य अधिकारी अपने-अपने विभागों से संबंधित रिपोर्टों को ठीक से देखने लगे कि कहीं उनके विभाग से संबंधित कोई सवाल खड़ा न हो जाएं। बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता उपायुक्त द्वारा बाहर निकाले जाने की बात सुन चुपचाप अपनी फाइलों को उठा बाहर चले गए। उपायुक्त ने उन्हें जाते समय भी हड़काते हुए कहा कि आधा घंटे में सारा रिकार्ड लेकर उनके कार्यालय में आएं।
हुआ यूं कि पत्रकारों व प्रशासन के बीच जिले में विकास कार्यों व अन्य मुद्दों को लेकर बैठक चल रही थी। उसी समय एक पत्रकार से उपायुक्त से सवाल किया कि बिजली विभाग द्वारा जिले में लोगों को सस्ते दामों पर अपने कार्यालय में स्टाल लगवाकर एलईडी लाइटें बिकवाई थीं।
जिले के लोगों ने उन लाइटों को जमकर खरीदा था तथा उनकी गारंटी भी तीन साल की दी गई थी, लेकिन छह माह के अंदर ही वे खराब हो गईं और लोग अब उन लाइटों को बदलवाने के लिए बिजली विभाग के सभी उपमंडल कार्यालयों पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो उन एलईडी लाइटों को बदलने वाला कोई मिल रहा है और न ही कोई अधिकारी संतोष जनक जवाब दे रहा है।
इतना सुनते ही उपायुक्त ने कार्यकारी अभियंता से इस बारे में जानकारी मांगी तो वे ठीक से जानकारी नहीं दे पाए तथा इधर-उधर बगले झांकने लगे। यह देख उपायुक्त गुस्से में आ गए तथा उन्हें पहले तो जमकर हड़काया तथा फिर उन्हें बैठक से बाहर निकाल दिया तथा कहा कि पहले सारी जानकारी लो, उसके बाद आधा घंटे में आकर मेरे कार्यालय में मिलो।
यह देख सभी अधिकारी भी एकाएक चुप हो गए। उसके बाद कार्यकारी अभियंता चुप बैठक से चले गए। उपायुक्त ने कहा कि अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, अपने विभाग के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।