स्याना बवाल की हकीकत को खोलने के लिए पुलिस-एसआईटी ने भले ही एढ़ी-चोटी का जोर लगा दिया हो, लेकिन आठ दिन बाद भी नतीजा महज सिफर है। मंगलवार को एसएसपी समेत आला अफसरों और 250 रिक्रूट ने घटनास्थल पर इंस्पेक्टर की पिस्टल, कारतूस आदि को बरामद करने के लिए कांबिंग की, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा।
स्याना बवाल को आठ दिन से अधिक का समय बीत चुका है। बवाल में इंस्पेक्टर समेत युवक सुमित की गोली लगने से हुई मौत अब भी पहेली ही बनी नजर आ रही है। पुलिस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि आखिर किसको, किसने, कब और कैसे गोली मारी है। न ही पुलिस अभी इस नतीजे पर पहुंच सकी है कि बवाल एक सोची समझी साजिश थी या फिर गोली लगना एक हादसा था।
खैर जो भी हो, पुलिस जांच कर जल्द ही खुलासे करने का दावा कर रही है। मंगलवार को एसएसपी प्रभाकर चौधरी, एसपी सिटी, एसपी क्राइम, एसपी देहात अपने साथ स्थानीय पुलिस बल और करीब ढाई सौ रिक्रूट को लेकर घटनास्थल पर पहुंचे। यहां रिक्रूट के साथ टीम ने खेतों में इंस्पेक्टर की गायब हुई लाइसेंसी पिस्टल, कारतूस समेत अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के लिए कांबिंग की।
करीब तीन घंटे तक चली कांबिंग में न तो पिस्टल और न ही कोई अन्य खास तथ्य पुलिस के हाथ लगा। इसके बाद अधिकारी घटनास्थल से लौट गए। स्याना कोतवाली प्रभारी किरनपाल सिंह ने बताया कि करीब तीन घंटे तक खेतों में कांबिंग की गई, लेकिन पिस्टल व अन्य चीजें बरामद नहीं की जा सकी हैं। जांच जारी है।