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नर्सरी: कोर्ट का दिल्ली सरकार को एक और झटका

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हाईकोर्ट ने नर्सरी दाखिला के लिए उम्र तय करने संबंधी दिल्ली सरकार के फैसले पर भी रोक लगा दी।  अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार बिना प्रक्रिया अपनाए कोई भी निर्णय लेकर बच्चों व उनके अभिभावकों को आश्चर्यचकित व प्रताड़ित नहीं कर सकती।
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अदालत के इस आदेश के बाद अब चार वर्ष से ज्यादा आयु के बच्चों को भी नर्सरी में दाखिला मिल सकेगा। प्रबंधन कोटे के बाद अब इस मामले में सरकार को दूसरा झटका लगा है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने करीब 20 बच्चों द्वारा दिल्ली सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर यह अंतरिम फैसला दिया।

अदालत ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2007 में नर्सरी दाखिलों के लिए न्यूनतम आयु तय की थी और उसमें अधिकतम आयु का कोई हवाला नहीं है। सरकार ने जो फैसला लिया है वह सरासर 2007 के फैसले का उल्लंघन है।
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नर्सरी दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा तय कर दी

अदालत ने कहा कि इस मामले में सरकार ने एक कार्यालयी आदेश जारी कर नर्सरी दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा तय कर दी। इस प्रक्रिया में उपराज्यपाल से कोई राय या सहमति नहीं ली गई। स्पष्ट है कि सरकार ने निर्णय में लेने में कोई प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

साथ ही न तो किसी का पक्ष सुना और न ही उन्हें नोटिस जारी कर पक्ष रखने का मौका दिया। सरकार इस प्रकार का निर्णय लेकर बच्चों व उनके अभिभावकों को आश्चर्यचकित व प्रताड़ित नहीं कर सकती। यदि इस आदेश पर रोक नहीं लगाई तो बच्चों के भविष्य पर असर पड़ेगा। ऐसे में वे सरकार के आयु तय करने संबंधी फैसले पर रोक लगाते हैं।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल तय करते हुए निर्देश दिया कि चार वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चे का आवेदन भी 9 फरवरी शाम 4 बजे तक स्वीकार किया जाए। न्यायमूर्ति मनमोहन ने पहले दो फरवरी को इस निर्णय पर रोक लगाने से इनकार करते हुए तीन छात्रों को राहत प्रदान की थी। लेकिन करीब 20 अन्य याचिकाएं आने के बाद अदालत ने यह फैसला दिया है।
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