दिल्ली के स्कूलों में नर्सरी दाखिले की सूची जारी होने के साथ ही एडमिशन क्राइटेरिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बार इंटर स्टेट ट्रांसफर के 5 प्वाइंट को लेकर अभिभावकों ने सवाल उठाया है। इसमें खास तौर से एनसीआर से ट्रांसफर केस शामिल हैं।
स्कूलों में जारी हो रही सूची में इस बार 75 प्वाइंट पाने वालों की बल्ले-बल्ले है। इसमें इंटर स्टेट ट्रांसफर के 5 प्वाइंट का बड़ा रोल है। डीपीएस आरकेपुरम ने नर्सरी दाखिले के लिए कुल 573 लोगों की सूची जारी की है। इसमें 415 आवेदन ऐसे हैं, जिन्हें डिस्टेंस के अलावा इंटर स्टेट ट्रांसफर केस का फायदा मिला है। इसके कारण एल्युमनी अभिभावक दाखिले की सूची से बाहर हो गए।
ट्रांसफर केस को लेकर अब अभिभावक और शिक्षा के अलग-अलग फोरम से सवाल उठने लगे हैं। लोग इसमें फेक ट्रांसफर की बात कर रहे हैं। शिक्षा विभाग में इसकी शिकायत भी की गई है। नर्सरी डॉट कॉम के फाउंडर सुमित वोहरा ने इस संबंध में शिक्षा विभाग में इसकी शिकायत की है। इस क्राइटेरिया में एनसीआर को बाहर रखने को कहा है।
डीपीएस एल्युमनी के बच्चे को भी दाखिला नहीं
डीपीएस की सूची जारी हुई तो अमित के बेटे का नाम उसमें शामिल नहीं था। अमित को उम्मीद थी कि वह डीपीएस में पढ़ चुके हैं तो उनका दाखिला हो जाएगा, लेकिन इंटर स्टेट ट्रांसफर और सिबलिंग के साथ ही ट्रांसफर प्वाइंट से उनका बेटा दाखिले की दौड़ से बाहर हो गया। अमित कहते हैं कि सूची को देखकर साफ है कि इसमें गड़बड़ी हुई है। इंटर स्टेट ट्रांसफर के गलत दस्तावेज लगाकर लोग दाखिला ले रहे हैं। उनका कहना है एनसीआर वाले इसमें सबसे ज्यादा शामिल हैं।
इंटर स्टेट ट्रांसफर पर क्या है समस्या
इंटर स्टेट ट्रांसफर में सबसे ज्यादा समस्याएं एनसीआर के क्षेत्र नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद को लेकर है। जानकारों का कहना है कि इसे इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए। नर्सरी डॉट कॉम के सुमित वोहरा के मुताबिक नोएडा, गाजियाबाद गुड़गांव और फरीदाबाद में अगर कोई अभिभावक रहता है और वह दिल्ली के किसी स्कूल से 8 किलोमीटर के दायरे में आता है तो उसे 70 अंक मिलते हैं। इसके साथ ही लोग इंटर स्टेट ट्रांसफर दिखाकर नोएडा से दिल्ली आ जाते हैं तो उन्हें 70 प्लस 5 प्वाइंट और मिल जाते हैं। वोहरा कहते हैं कि इसमें शिक्षा विभाग को बदलाव करना चाहिए। अभी 28 फरवरी तक का समय है और बदलाव किया जा सकता है।