जिला अस्पताल में तीन साल पहले लाखों की लागत से न्यूमेटिक सिस्टम लगाया गया था। इस सिस्टम से हवा के प्रेशर के जरिये अस्पताल में एक जगह से दूसरी जगह पर दवाइयां, ब्लड सैंपल और दूसरी चीजें भेजी जा सकती हैं। लेकिन अभी तक इस सिस्टम को शुरू नहीं किया गया है।
फिलहाल अगर वॉर्ड में भर्ती मरीजों की कोई जांच कराने की जरूरत पड़ती है तो इनको लेकर लैब में जाना पड़ता है। अगर ज्यादा गंभीर मरीज है तो अस्पताल के स्टाफ को ब्लड सैंपल लेकर पैथ लैब में जाना पड़ता है।
इसके साथ ही अगर वॉर्ड में भर्ती मरीजों को दवाइयों की जरूरत पड़ती है तो अस्पताल के स्टाफ को या उनके परिजनों को अस्पताल की फॉर्मेसी में आकर दवाइयां लेनी पड़ती है। इन सब दिक्कताें को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने लाखों की लागत से ये न्यूमेटिक सिस्टम लगवाया थी।
न्यूमेटिक सिस्टम से दवाइयां, ब्लड सैंपल दूसरी चीजें कुछ ही सेकेंड में एक स्थान से दूसरी जगह पर भेजी से जा सकती हैं। इसमें हवा से प्रेशर बनाया जाता है और सामान को दूसरी जगह पर भेजा जाता है।
लेकिन ये सिस्टम पिछले तीन सालों से धुल फांक रहा है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सिस्टम को शुरू करने के लिए काम किया जाएगा।
जिला अस्पताल में दवाइयों की कमी
जिला अस्पताल में दवाइयों की किल्लत शुरू हो गई है। खांसी, खुजली होने पर लगाने वाली दवाई, समेत कई अन्य दवाइयां खत्म हो गई हैं। मरीजों को बाहर से दवाइयां लेने की सलाह दी जा रही है।
फार्मेसी के स्टाफ ने बताया कि पिछले एक महीने से अस्पताल में दवाइयों की किल्लत चल रही हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि 10 दिन के अंदर सभी दवाइयां आ जाएंगी।