शाहबेरी हादसे ने एनसीआर में एक ऐसी खतरे की घंटी बजाई है। जिससे हर विभाग को चौकन्ना होकर कार्रवाई की आवश्यकता है। शाहबेरी में फिलहाल दो भवन हादसे का शिकार हुए हैं लेकिन अगर ऐसे इलाके में आग लगी तो हादसे की तस्वीर इससे भी ज्यादा भयावह हो सकती है। क्योंकि ग्रेटर नोएडा, नोएडा ही नहीं पूरे एनसीआर क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर खेत की भूमि पर कॉलोनाइजर और लालची बिल्डर इस तरह के भवन बना रहे हैं, जिनमें आग के बचाव के ठोस उपाय नहीं है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई न करना दमकल विभाग की लापरवाही को भी उजागर कर रहा है।
शाहबेरी में दोनों भवनों के गिरने के बाद राहत और बचाव कार्य में यहां के संकीर्ण और जर्जर रास्ते काफी बाधा बने थे। राहत और बचाव की टीम हीं नहीं। उपकरण भी मौके पर पहुंचाने में काफी परेशानी व देरी हुई थी। यहां राहत और बचाव कार्य में दमकल विभाग को भी लगाया गया था। दमकल विभाग ने यहां की स्थिति का आंकलन किया है।
वहीं, आम लोग भी अब यह सोचने लगे हैं कि शाहबेरी या इस जैसी किसी अन्य कॉलोनी में आग लगी तो कितनी मुश्किल हो सकती है। आग बुझाने जरा सी लापरवाही और देरी एक भवन से दूसरे भवन को भी आग के आगोश में लेने के लिए काफी होती है। एनसीआर में खड़ी हुईं ऐसी अधिकांश कॉलोनियों में आग से बचाव के ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। अवैध होने के कारण दमकल विभाग की एनओसी तो इनके पास है ही नहीं, आग से बचाव के उपकरणों का भी इनमें बंदोबस्त नहीं है।
'बिल्डरों ने लगा रखे हैं कई ट्रांसफार्मर’
शाहबेरी निवासी पंकज ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बिल्डर अपने भवनों में विद्युत आपूर्ति के लिए अलग-अलग ट्रांसफार्मर लगवा लेते हैं। इसके चलते कॉलोनी में कई ट्रांसफार्मर लगा दिए गए हैं। इनमें कई बार चिंगारी भी उठती है और आग लगने की आशंका बनी रहती है।
ज्वाइंट ऑपरेशन में होगी कार्रवाई : सीएफओ
शाहबेरी हादसे की घटना के बाद जिला प्रशासन ने बैठक कर ज्वाइंट ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया है। इसमें सभी विभाग अपने-अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे। दमकल विभाग को जो भी निर्देश दिए जाएंगे। उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। ऐसे बिल्डरों के खिलाफ हमने कुछ एफआईआर भी दर्ज कराईं हैं। जिन्होंने आग से बचाव की व्यवस्था नहीं की है।-अरुण कुमार सिंह, सीएफओ, गौतमबुद्ध नगर