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एनसीआर में गैर बिके मकानों की संख्या 9 फीसदी गिरी, प्रॉपर्टी ब्रोकरेज फर्म का दावा

Wed, 16 Jan 2019 06:25 AM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इमारत - फोटो : अमर उजाला
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बिक्री में सुधार से 2018 में एनसीआर में अनबिके मकानों की संख्या में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2017 के 2,05,000 अनबिके मकानों की तुलना में इस साल 1,86,714 मकान ही अनबिके रहे। प्रॉपर्टी ब्रोकरेज और कंसल्टिंग फर्म एनारॉक द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, एनसीआर में इस साल मकानों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2018 में अब तक 44,300 मकान बिक चुके हैं, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 37,610 था। वहीं, नए मकानों की बिक्री में 2017 के 22,180 इकाइयों के मुकाबले 2018 में 17 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। इस साल अब तक कुल 26,010 नए मकान बिक चुके हैं। एनारॉक के चेयरमैन अनुज पूरी ने कहा कि एनसीआर में बढ़ती बिक्री के बावजूद यह क्षेत्र रुकी हुई/देरी से चल रहीं परियोजनाओं के मुद्दे से जूझ रहा है। 

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शीर्ष सात शहरों में बढ़ी बिक्री
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, सात शहरों में 2018 मकानों की बिक्री में 18 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। इन शहरों में 2017 के 2,11,130 मकानों के मुकाबले इस साल 2,48,310 मकान बिके। एनसीआर, एमएमआर (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रिजन), बंगलूरू और पुणे में इस साल कुल मिलाकर 82 फीसदी मकान बिके। वहीं, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता को मिलाकर यह आंकड़ा 18 फीसदी है। 

घटा है इंतजार का समय
रिपोर्ट में कहा गया है कि तरलता संकट के बावजूद 2017 की तुलना में इस साल शीर्ष सात शहरों में मकानों की बिक्री में 18 फीसदी और नई लांच परियोजनाओं में 33 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं, अनबिके इंवेंट्री में 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अनबिके इंवेट्री की संख्या 2017 में जहां 7,26,218 थी, वह 2018 में घटकर 6,73,208 रह गई है। इसके अलावा इन सात शहरों में आवासीय इंवेट्री के लिए इंतजार का समय 2017 की चौथी तिमाही के 47 महीने के मुकाबले 2018 की समान अवधि घटकर 33 महीने रह गया है। नोटबंदी के कारण 2017 की चौथी तिमाही में इंतजार का समय बढ़ गया था, जो 2016 की चौथी तिमाही में 40 महीने था। 
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तरलता संकट से जूझता रहा क्षेत्र
पुरी ने कहा कि विभिन्न संरचनात्मक परिवर्तन के प्रभाव के कारण भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र पिछले साल की तुलना में बढ़ने की ओर अग्रसर लग रहा था। हालांकि, ठप पड़ी परियोजनाओं और तरलता संकट के कारण आवास क्षेत्र 2018 में संकट से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा खरीदारों की मांग के अनुरूप आपूर्ति के लिए बिल्डर नई परियोजनाएं शुरू करने को लेकर सतर्क थे। साथ ही बिल्डरों ने खरीदारों द्वारा सस्ते मकान की मांग को पूरा करने के लिए साइज में कटौती की। 
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