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चिंताजनक: 10 साल में असोला भाटी वन्यजीव अभ्यारण्य में तेंदुओं की आधी रह गई संख्या, आठ ने हादसों में गंवाई जान

Tue, 24 Jan 2023 05:51 AM IST
आकाश दुबे सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेंदुए सड़क हादसे का शिकार नहीं होते तो आबादी दोगुना हो सकती थी। फिलहाल यहां आठ तेंदुए हैं, जबकि पिछले 10 साल में सड़क दुर्घटनाओं में इतने ही तेंदुए मर चुके हैं। यानी आबादी अब 50 फीसदी रह गई है।
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असोला भाटी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की तादाद एक बार फिर बढ़ने लगी है। फिलहाल 32 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र में आठ व्यस्क तेंदुए हैं। हाल ही में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी(बीएनएचएस) ने अभ्यारण्य में दो शावकों का जन्म होने की पुष्टि की। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेंदुए सड़क हादसे का शिकार नहीं होते तो आबादी दोगुना हो सकती थी। फिलहाल यहां आठ तेंदुए हैं, जबकि पिछले 10 साल में सड़क दुर्घटनाओं में इतने ही तेंदुए मर चुके हैं। यानी आबादी अब 50 फीसदी रह गई है। 

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दिल्ली-गुरुग्राम-फरीदाबाद के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित यह अभयारण्य पशुओं के लिए दोबारा जन्स्थली के तौर पर विकसित होने लगा है। पिछले दिनों एक मादा तेंदुए से दो शावकों का जन्म होने के बाद एक बार फिर वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में की जा रही पहल से उम्मीदें बढ़ी हैं। बीएनएचएस के सहायक निदेशक डॉ. सुहैल मदान के मुताबिक अभ्यारण्य में आठ तेंदुए हैं।

यहां एक ही मादा है, जिसने बच्चों को जन्म दिया है। यहां हाइना, बंदर, नीलगाय, हॉग डीयर, सांभर, ब्लैक बग, खरगोश, बिल्ली समेत फिलहाल 28 स्तनधारी जानवर हैं। असोला भाटी दिल्ली रिज का दक्षिणी भाग है। अरावली श्रृंखला की गुजरात से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा में होती हुई दिल्ली के असोला भाटी के रिज क्षेत्र तक है। यह सरिस्का-दिल्ली वन्यजीव कॉरिडोर का यह हिस्सा है। तेंदुए की हलचल इस कॉरिडोर पर दिल्ली तक होने की पुष्टि होती है। 
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वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से रहेंगे सुरक्षित 
असोला-सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच कई किलोमीटर तक वन्य क्षेत्र में अलग अलग प्रजाति के वन्यजीवों का बसेरा है। रास्ते में गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड और सोहना में जानवरों के लिहाज से तीन दुर्घटना की आशंका वाली सड़कें हैं। पिछले 10 साल में असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य के इर्द गिर्द आठ तेेंदुए की जान सड़क दुर्घटनाओं की वजह से गई। अगर उनके आने जाने के लिए अलग कॉरिडोर होगा तो जान का जोखिम नहीं रहेगा। पशुओं की तादाद में बढ़ोतरी के लिए जरूरी है कि आसपास के क्षेत्रों में उनके लिए सुरक्षित कॉरिडोर, पानी, खाना के साथ साथ रिहायशी क्षेत्र और वाहनों से दूरी जरूरी है।
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