जिला अस्पताल में पेयजल और शौचालयों की बदहाली, मरीजों को परेशानी
नूंह। जिला मुख्यालय पर स्थित सरकारी अस्पताल में स्वच्छ पेयजल और साफ शौचालयों की समुचित व्यवस्था नहीं है। आरओ प्लांट बंद होने के कारण मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों को 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। वहीं, अस्पताल के कई शौचालयों में नियमित सफाई न होने से गंदगी और दुर्गंध फैली हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों पर इससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या गरीब परिवारों की होती है। उनका कहना है कि सरकार इलाज पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बैंसी से आए तीमारदार असलम ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इलाज का खर्च कम होता है, पर पानी खरीदकर पीना पड़ता है। उन्हें पूरे दिन में कई बोतलें लेनी पड़ती हैं, जिससे गरीब आदमी पर बोझ बढ़ता है। नूंह निवासी रहीसा बेगम ने महिला शौचालयों की खराब हालत और दुर्गंध की शिकायत की।
खेड़ला से आए इरफान ने आरओ बंद होने पर पानी के लिए भटकने की बात कही। उन्होंने साफ पानी को मरीजों की पहली जरूरत बताया। लोगों के अलावा अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पेयजल और शौचालय की समस्या नई नहीं है। इस बारे में कई बार संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई है। हालांकि, अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। यह स्थिति मरीजों और अस्पताल के कामकाज दोनों को प्रभावित कर रही है।
पर्याप्त पेयजल और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल और साफ शौचालय केवल सुविधा नहीं हैं। ये संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं हैं। गंदगी और दूषित वातावरण मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। मरीजों और तीमारदारों ने जिला प्रशासन से अस्पताल प्रबंधन से आरओ प्लांट तत्काल चालू कराने को कहा है। साथ ही, पर्याप्त पेयजल और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने की अपील की है।
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इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है मरीजों को पानी और बेहतर शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए इस बारे में संबंधित एसएमओ को कहकर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। - ज्योत्सना, सिविल सर्जन, नूंह