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नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में बड़ी उपलब्धि: कैंसर से खराब जबड़ा हटाकर पैर की हड्डी से बनाया नया जबड़ा, सर्जरी सफल

Sat, 26 Sep 2026 07:19 PM IST
Rahul Kumar Tiwari संवाद न्यूज एजेंसी, नूंह

सार

नल्हड़ के एसएचकेएम मेडिकल कॉलेज में जबड़े के कैंसर से पीड़ित 46 वर्षीय मरीज की करीब 12 घंटे चली जटिल सर्जरी सफल रही। डॉक्टरों ने कैंसर प्रभावित जबड़ा हटाकर पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार कर माइक्रोवास्कुलर तकनीक से पुनर्निर्माण किया।
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जबड़े के कैंसर की जटिल सर्जरी सफल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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शहीद हसन खान मेवाती (एसएचकेएम) राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नल्हड़ के दंत चिकित्सा विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां जबड़े के कैंसर से पीड़ित 46 वर्षीय मरीज की करीब 12 घंटे चली जटिल फ्री फिबुला माइक्रोवास्कुलर ग्राफ्ट रीकन्स्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। 15 सितंबर को हुई इस सर्जरी में कैंसर प्रभावित निचले जबड़े को हटाने के बाद मरीज के पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार कर उसका पुनर्निर्माण किया गया। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया के बाद मरीज के चेहरे के आकार के साथ बोलने और निगलने जैसी आवश्यक गतिविधियों को बेहतर ढंग से बहाल करने में मदद मिलेगी।
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मरीज मूल रूप से कानपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और वर्तमान में तावड़ू के पास एक डिलीवरी-सर्विस वेयरहाउस में काम करता है। करीब 15 वर्षों से तंबाकू और मौखिक तंबाकू के सेवन की आदत के चलते जून 2026 में उसे मुंह में दर्द की शिकायत हुई। शुरुआत में उसने स्थानीय दंत चिकित्सक से उपचार कराया और जुलाई में प्रभावित स्थान का एक दांत निकाला गया, लेकिन घाव ठीक नहीं हुआ। लगातार न भरने वाले घाव के चलते उसे आगे की जांच के लिए एसएचकेएम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

अस्पताल में जांच के बाद अगस्त में घाव की बायोप्सी की गई। हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में मौखिक गुहा के कार्सिनोमा की पुष्टि हुई। आवश्यक जांच और प्री-ऑपरेटिव तैयारी पूरी करने के बाद दंत चिकित्सा विभाग की मैक्सिलोफेशियल सर्जरी यूनिट ने मरीज को जटिल शल्य चिकित्सा के लिए तैयार किया।
सर्जरी के दौरान पैर की फिबुला हड्डी का करीब 25 सेंटीमीटर हिस्सा उसकी रक्त वाहिकाओं समेत निकाला गया। माइक्रोस्कोप की सहायता से हड्डी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को गर्दन की रक्त वाहिकाओं से जोड़ा गया। इसके बाद हड्डी को जबड़े के प्राकृतिक आकार में ढालकर टाइटेनियम प्लेट और स्क्रू की मदद से फिक्स किया गया। इस प्रक्रिया में कैंसर प्रभावित हिस्सा हटाने के साथ ही चेहरे की संरचना को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया गया।
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सर्जरी दंत चिकित्सा विभाग की डॉ. विजयलक्ष्मी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नितेश छिकारा और डॉ. दिव्यांक की टीम ने की। डॉ. रविंदर सिंह, डॉ. हिमांशु शेखावत, डॉ. दीपिका और डॉ. कोमल ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. अमित चौधरी और डॉ. किरण के नेतृत्व में टीम ने करीब 12 घंटे तक मरीज के महत्वपूर्ण शारीरिक मानकों को स्थिर बनाए रखा।

मेडिकल कॉलेज निदेशक डॉ. मुकेश कुमार ने इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से की गई यह सर्जरी क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ी सुविधा है। वहीं दंत चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता शर्मा ने कहा कि टीम लंबे समय से इस जटिल ऑपरेशन की तैयारी और योजना पर काम कर रही थी। उन्होंने इसे विभाग और संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब मेवात क्षेत्र के मरीजों को जबड़े के जटिल पुनर्निर्माण की अत्याधुनिक सुविधा सरकारी संस्थान में ही मिल सकेगी।
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