नूंह। किसानों के लिए बनाए गए सरकार के मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर इस साल भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। सैंकड़ों किसानों ने फर्जी तरीके से दूसरे गांवों और किसानों की जमीन अपने नाम दर्ज करवा ली है। इसका मुख्य उद्देश्य बाजरे की फसल पर मिलने वाली भावांतर भरपाई का लाभ उठाना बताया जा रहा है।
जिले के गांगोली, आलदोका, खेड़ा खलीलपुर और छपेड़ा सहित कई गांवों के किसानों की हजारों एकड़ जमीन पोर्टल पर गलत तरीके से दूसरों के नाम अंकित हो गई है।
किसानों का आरोप है कि असल किसान अब अपनी जमीन का रिकॉर्ड सही करवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। गांगोली गांव के मानसिंह ने बताया कि उनके पास पैतृक जमीन के कागजात मौजूद हैं, फिर भी पोर्टल पर उनकी जमीन किसी और के नाम दिख रही है। तहसील और कृषि विभाग में कई बार जाने के बावजूद समाधान नहीं मिला।
आलदोका गांव के हरीसिंह ने कहा कि चार भाइयों की 12 एकड़ जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर चढ़ गई है। पोर्टल पर दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने पर फोन बंद आता है। उन्होंने डीसी को समाधान शिविर में शिकायत की। हरीसिंह ने बताया कि यह समस्या अकेले उनकी नहीं, बल्कि सैकड़ों किसानों की है।
खेड़ा खलीलपुर के सतपाल सिंह ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोग सरकार से भावंतर भरपाई का लाभ ले रहे हैं, जबकि असली किसान अपने हक के लिए परेशान हैं।
छपेड़ा गांव के भगतसिंह और रब्बा ने कहा कि यह किसानों के साथ खुली लूट है। यदि जमीन का रिकॉर्ड सही नहीं किया गया तो वे आंदोलन पर उतरेंगे। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग और थाने में समाधान के लिए जाने पर अधिकारियों के बीच फाइलें घूमती रहती हैं, जबकि फसल खराब हो चुकी है।
किसान नेता देवीसिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलीभगत कर फर्जी कागजात पोर्टल पर लगाकर जमीन हड़प ली। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और सिर्फ आश्वासन दिया गया।
किसानों ने उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसा अन्याय न हो।
इस मामले में शिकायतें प्राप्त हुई हैं और जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जिन किसानों की जमीन गलत तरीके से दर्ज हुई है उनका ब्योरा जल्द सही किया जाएगा और फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। -अखिल पिलानी, डीसी, नूंह