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Nuh News: जिले के 22 गांवों में शुरू होगी घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था

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ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार की पहल
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दिनेश देशवाल
नूंह। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। ग्रामीण विकास विभाग (हरियाणा राज्य स्वच्छ भारत मिशन सोसाइटी) ने 21 जुलाई को जारी आदेशों में राज्य की 7,500 या उससे अधिक प्रोजेक्टेड जनसंख्या वाली महाग्राम एवं ग्राम पंचायतों में किराये के आधार पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली, एक चालक और एक कचरा संग्राहक नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था घर-घर से कचरा संग्रहण, परिवहन, पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए लागू की जाएगी। जिले के 22 गांवों में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था होगी।

विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लेगी। इसके लिए अधिकतम मासिक व्यय 55 हजार रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया, चालक और कचरा संग्राहक का वेतन शामिल होगा। यह खर्च पंचायतें 15वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, स्वयं के राजस्व तथा अन्य उपलब्ध निधियों से वहन करेंगी।
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आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक घर, दुकान, सरकारी कार्यालय, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रणाली से जोड़ा जाएगा। पंचायतों को प्रतिदिन 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण सुनिश्चित करना होगा तथा खुले में कचरा फेंकने या जलाने पर रोक रहेगी।
इस योजना के तहत जिले के 22 गांव चिन्हित किए गए हैं जिनमें फिरोजपुर झिरका खंड के बीवां व साकरस, नगीना खंड के भादस व नगीना, नूंह खंड के अड़बर, आकेड़ा, बझेड़ा, फिरोजपुर नमक, घासेड़ा, मालब, मेवली व रानीका, पिनगवां खंड के झिमरावट, पिनगवां, शिकरावा, पुनहाना खंड के बिछोर, बीसरु, नई, नवलगढ़ बिछोर खुर्द, सिंगार तथा तावडू खंड के निजामपुर व सहसौला पाटुका ग्राम पंचायत को शामिल किया गया है।
कचरे के स्रोत पर ही चार श्रेणियों में पृथक्करण को अनिवार्य किया गया है। इनमें हरा डिब्बा जैविक एवं गीले कचरे, नीला सूखे एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरे, लाल सैनिटरी कचरे तथा काला विशेष श्रेणी के कचरे (बैटरी, बल्ब, ई-वेस्ट, दवाइयां आदि) के लिए निर्धारित किया गया है। ट्रॉली में भी चार अलग-अलग खंड बनाए जाएंगे ताकि संग्रहण के दौरान कचरा मिश्रित न हो।

निर्देशों के अनुसार ट्रैक्टर की क्षमता न्यूनतम 20 हॉर्स पावर होगी और उसमें घरों को सूचना देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक या म्यूजिकल हूटर लगाया जाएगा। ट्रॉली में हाइड्रोलिक टिपिंग सिस्टम, वर्षा से बचाव के लिए तिरपाल या रोल-टॉप कवर तथा ग्राम पंचायत का नाम, स्वच्छ भारत मिशन का लोगो और शिकायत हेल्पलाइन नंबर भी प्रदर्शित करना होगा।
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ग्राम सचिव को पूरे प्रोजेक्ट के आय-व्यय और उपयोगकर्ता शुल्क का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी दी गई है। सरपंच, पंचायत सचिव, बीडीपीओ और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। विभाग ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
- ज्योति, अतिरिक्त उपायुक्त, नूंह
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