शाह चोखा का राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बदहाल व्यवस्था, बरसात में स्कूल परिसर में भर जाता है पानी
विद्यालय में केवल चार कमरे, एक कमरा रसोई और दूसरे में स्टाफ रूम, पढ़ाई के लिए केवल दो कमरे
सद्दाम हुसैन
पिनगवां। एक ओर सरकार बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, दूसरी ओर नूंह के पिनगवां खंड के ऐतिहासिक गांव शाह चोखा का राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है। करीब 910 छात्राओं वाला यह विद्यालय कमरों की भारी कमी, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि भीषण गर्मी में छात्राएं टूटे-फूटे टीन शेड के नीचे और खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि बरसात होते ही स्कूल परिसर और कमरों में पानी भर जाने से पढ़ाई प्रभावित हो जाती है।
विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक 411 और छठी से बारहवीं तक 499 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। विद्यालय में केवल चार कमरे हैं। इनमें से एक कमरा मिड-डे-मील की रसोई और दूसरा स्टाफ रूम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पढ़ाई के लिए केवल दो कमरे बचते हैं, जो जर्जर हैं। दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, छत का पलस्तर गिर रहा है और सरिया तक दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में छात्राओं और शिक्षकों के सिर पर हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। विद्यालय में खेल का मैदान भी नहीं है।
पर्याप्त कक्षाओं और सुविधाओं के अभाव में कई कक्षाओं की पढ़ाई खुले में करानी पड़ती है। विद्यालय के प्राचार्य आबिद हुसैन ने बताया कि 910 छात्राओं के लिए केवल दो कमरे उपलब्ध हैं। कमरों की कमी को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, उपायुक्त और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। नए भवन और अतिरिक्त कमरों की तत्काल आवश्यकता है। कक्षा 11वीं की छात्रा आफिया खान और कक्षा 12वीं की छात्रा सोनिया ने बताया कि गर्मी में टीन शेड के नीचे बैठना बेहद मुश्किल होता है और बरसात में स्कूल में पानी भर जाता है। ग्रामीण डॉ. यूनुस, जमील अहमद, जुबेर, साकिर और समीम अहमद ने कहा कि मेवात में अब लोग बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं, लेकिन स्कूल की बदहाल स्थिति उनके उत्साह को कमजोर कर रही है।
गौरतलब है कि इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1991 में क्षेत्र की बेटियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विद्यालय आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
सरकार को जल्द नया भवन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें।
-जुबेर खान, अभिभावक
समय रहते भवन और कमरों की व्यवस्था नहीं हुई तो छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती रहेगी और हादसे का खतरा भी बना रहेगा।
- साकिर खान, अभिभावक
छात्राओं को बेहतर शिक्षा के लिए सुरक्षित भवन, पर्याप्त कमरे, शिक्षक और खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द मिलनी चाहिए।
- शमीम अहमद, एसएमसी चेयरमैन
विद्यालय में करीब 910 छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए केवल दो कमरे उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण छात्राओं को खुले में पढ़ाना पड़ता है। नए भवन और अतिरिक्त कमरों की मांग को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं। उम्मीद है कि जल्द विद्यालय को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- आबिद हुसैन प्रिंसिपल