अजीत डोभाल सीआरपीएफ के कार्यक्रम में शामिल हुए
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत को देश कभी नहीं भूलेगा। दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आज हमारा देश पूरी तरह सक्षम है। उक्त बातें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हमले में शहीद हुए जवानों को याद करते हुए कहीं।
वह मंगलवार को कादरपुर सीआरपीएफ कैंप में सीआरपीएफ के 80वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे थे।
डोभाल ने कार्यक्रम के दौरान करीब 16 मिनट तक जवानों को संबोधित किया। अपना संबोधन शुरू करने से पहले उन्होंने हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने पिछले कुछ साल में अपने आप को काफी मजबूत किया है।
देश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत को न कोई भूला है और न ही कोई भूलेगा।
यह दूसरा मौका था जब डोभाल मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किए जाने के बाद से किसी भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने पहुंचे। इससे पहले 2015 में उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 54वें स्थापना दिवस पर परेड का निरीक्षण किया था।
उन्होंने सीआरपीएफ को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि भारत के विभाजन के दौरान भी सीआरपीएफ ने जो भूमिका अदा की थी वह सराहनीय है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 37 देश टूट गए, जिसमें से 28 देश तो अपने आंतरिक कलह की वजह से टूटे, लेकिन भारत में जो आंतरिक सुरक्षा सीआरपीएफ ने मुहैया कराई, उस पर गर्व है।
देश हर तरह की चुनौती से निपट सकता है
डोभाल ने कहा ‘हमें क्या करना चाहिए। हमारा रास्ता, हमारा उद्देश्य, हमारी प्रतिक्रिया और जवाब देने का समय क्या होना चाहिए। इन सबके लिए देश का नेतृत्व सक्षम और साहस से भरा है।
देश हर तरह की चुनौती से निपट सकता है और इसके लिए हमारे अंदर साहस है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि यह ‘बेहद त्रासदीपूर्ण घटना थी।
मनोबल ऊंचा है तो देश का भविष्य सुरक्षित है
डोभाल ने सीआरपीएफ से पीछे मुड़ कर न देखने और अतीत को लेकर चिंतित न होने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने बल से पेशेवर रुख अपनाने, विश्वसनीय प्रशिक्षण और शारीरिक क्षमता पर अधिक ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने कहा ‘अगर आपका मनोबल ऊंचा है तो देश का भविष्य सुरक्षित है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के तौर पर सीआरपीएफ की स्थापना की गई थी। फिलहाल सीआरपीएफ में तीन लाख कर्मी हैं.
होली नहीं मनाएंगे सीआरपीएफ कर्मी
सीआरपीएफ के डीजी आरआर भटनागर ने इस मौके पर कहा कि पुलवामा हमले के शहीद जवानों के शोक में इस बार सीआरपीएफ के कर्मी होली नहीं मनाएंगे। उन्होंने कहा कि 2018 में सीआरपीएफ ने 210 आतंकियों को मार गिराया। उन्होंने कहा कि नञ्चसलियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है और देश में अब कुछ ही नञ्चसल प्रभावित इलाके बचे हैं।