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Delhi NCR News: अब द्वारका एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा बनाने पर ग्रामीणों के किया विरोध

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यूईआर-2 की तरह द्वारका एक्सप्रेसवे पर बने टोल प्लाजा के विरोध में ग्रामीण एकजुट होने लगे
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में टोल प्लाजा बनाने के विरोध ने एक बड़े आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। अभी तक ग्रामीण केवल यूईआर-2 पर बक्करवाला-मुंडका टोल प्लाजा का विरोध कर रहे थे, लेकिन अब यह आंदोलन द्वारका एक्सप्रेसवे तक पहुंच गया है। दिल्ली-हरियाणा सीमा पर बिजवासन में चालू हुए टोल प्लाजा ने दोनों राज्यों के ग्रामीणों को एकजुट कर दिया है। आने वाले दिनों में ग्रामीण पंचायतें करने के साथ-साथ नेताओं से भी मिलकर इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
द्वारका एक्सप्रेसवे पर बिजवासन के पास चालू टोल प्लाजा ने ग्रामीणों का गुस्सा भड़का दिया है। रविवार को यहां दिल्ली और हरियाणा के कई गांवों के लोग इकट्ठा हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली के बिजवासन, बामलौनी, भरथल, पोचनपुर, धुलसिरस आदि गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सीमा पार उनकी खेती-बाड़ी, रोजगार और रिश्तेदारी हैं। ऐसे में हर रोज टोल देना उनकी जिंदगी पर सीधी मार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने टोल बंद नहीं किया तो यह आंदोलन उग्र होगा और सड़क से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गूंजेगा।
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यूईआर-2 पर बक्करवाला-मुंडका टोल प्लाजा भी ग्रामीण आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। यहां पहले से सक्रिय तीन संगठन संघर्ष को तेज करने में जुटे हैं। उनके पदाधिकारियों का कहना है कि उनके ट्रैक्टर, छोटे वाहन और सामान ढोने वाले ट्रक रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। टोल वसूली सीधे उनकी जेब पर भारी पड़ रही है। उनका आरोप है कि ग्रामीणों की आवाज को नजरअंदाज कर सरकार ने जबरन टोल संचालन शुरू किया।
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दिल्ली और हरियाणा में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी वही सत्ता में है। ऐसे में ग्रामीणों का आंदोलन भाजपा के लिए सीधा राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। इस मामले को लेकर भाजपा अन्य किसी दल पर आरोप नहीं लगा सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह विरोध लंबा खिंचता है तो भाजपा के ग्रामीण वोटबैंक पर सीधा असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने कहा कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने एलान किया कि आने वाले दिनों में पंचायतें आयोजित की जाएंगी और इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर लामबंदी होगी।
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