दिल्ली पुलिस ने लॉकडाउन खुलने के साथ ही बढ़ रहे अपराध पर अंकुश लगाने के लिए अब तक का बड़ा कदम उठाया है। अब अपराधी को दो केसों के बाद ही घोषित बदमाश (बैड करेक्टर) घोषित किया जाएगा। साथ ही अपराधी को दिल्ली से तड़ीपार किया जाएगा। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने अपराध खासकर स्ट्रीट क्राइम पर काबू पाने के लिए दिल्ली पुलिस के आला पुलिस अधिकारियों को इस तरह के सख्त आदेश दिए हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी बढ़ने व नौकरी खत्म होने से दिल्ली में अपराध बढ़ेगा। ऐसे में अपराध पर काबू पाने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस बदमाश के खिलाफ सेंधमारी, वाहन चोरी, डकैती, झपटमारी व आर्म्स एक्ट के दो केस हैं और वह अभी भी सक्रिय हैं तो उसे बीसी घोषित किया जाएगा। ऐसे बदमाशों के पांच वर्षों के रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
थाना स्तर पर उनका रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। ऐसे सभी बदमाशों की सूची तैयार की जा रही है। इन बदमाशों का मोबाइल नंबर व पता एकत्रित किया जा रहा है। मोबाइल नंबर लेकर उन पर सर्विलांस रखी जाएगी। अभी तक छह से सात केसों के बाद बदमाश को बीसी घोषित किया जाता था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा दो केस होने पर अपराधी को तड़ीपार भी किया जाएगा।
तड़ीपार होने पर उसे एक साल के लिए दिल्ली से बाहर रहना होगा। हालांकि अभी तक दो केस होने पर अपराधी को तड़ीपार करने का नियम है, मगर ये प्रक्रिया रूटीन अमल में नहीं लाई जा रही थी। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने अपराधी को तड़ीपार करने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए है।
बीसी होने पर क्या होता है
अगर कोई बदमाश बीसी घोषित हो जाता है तो दिल्ली पुलिस की सूची में उसका नाम दर्ज हो जाता है। दिल्ली में 26 जनवरी या 15 अगस्त जैसे बड़े आयोजन होते हैं तो सभी बीसी को उनके घर से उठाकर हिरासत में रखा जाता है। इसके अलावा बीसी होने पर मोहल्ले व समाज को पता लग जाता है और उसकी बदनामी होती है। बदनामी के डर से कई बार बदमाश गुनाह का रास्ता छोड़ देता है।
क्या होता है तड़ीपार
बदमाश को तड़ीपार करने का मतलब है कि उसे दिल्ली से एक वर्ष या ज्यादा समय तक दिल्ली से बाहर रहना पड़ता है। जिस बदमाश के खिलाफ कोई गवाह नहीं होता और लगातार अपराध करता रहता है उसके खिलाफ दिल्ली पुलिस कोर्ट को गुप्त रिपोर्ट देती है। इस रिपोर्ट के आधार पर अपराधी को तड़ीपार करने का आदेश दिया जाता है।