नगर निगम की सीमा में आने वाला कोई भी भवन अब हाउस टैक्स से नहीं बचेगा। नए नगर आयुक्त ने 10 फीसदी टैक्स बढ़ोतरी के साथ ही यह फैसला लिया है कि अब तक टैक्स न देने वालीं इमारतों को चिन्हित करके उनसे भी वसूली की जाए।
हालांकि नगर आयुक्त ने नए पैटर्न (कालोनियों को श्रेणियों में बांटकर) हाउस टैक्स लगाने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि छूटे भवनों को टैक्स के दायरे में लाकर निगम की इनकम बढ़ाई जाएगी।
नई बिल्डिंगों पर टैक्स लगाकर एक साल के भीतर टैक्स डिमांड डेढ़ से दोगुना करने का लक्ष्य है। मेयर और निगम पार्षद नवंबर 2014 में ही हाउस टैक्स में 10 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास कर चुके हैं।
यह प्रस्ताव एक अप्रैल से लागू होना है। पूर्व नगर आयुक्त इससे संतुष्ट नहीं थे और टैक्स को रिवाइज कर कालोनियों को श्रेणीवार विभाजित कर टैक्स लगाना चाहते थे।
इसके लिए टैक्स बढ़ोतरी का ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका है। अब नए नगर आयुक्त ने इस कवायद पर विराम लगा दिया है।
नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि टैक्स रिवाइज करने की बजाय ऐसी बिल्डिंगों को चिह्नित कर टैक्स वसूला जाएगा, जो अभी तक इस दायरे से बाहर हैं। कामर्शियल के साथ-साथ नई रेजीडेंशियल बिल्डिंगों को भी चिह्नित किया जाएगा।