एमसीडी और दिल्ली सरकार के बीच पिछले 27 वर्षों से उलझ रहे वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भाजपा नेतृत्व की पहल पर बुधवार को दिल्ली कैबिनेट और एमसीडी के वरिष्ठ भाजपा पार्षदों की कोर कमेटी के बीच उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है।
यह बैठक राजधानी के प्रशासनिक संतुलन की दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। क्योंकि एमसीडी व दिल्ली सरकार के बीच विभिन्न मामलों को लेकर लगातार हो रहे विवादों के कारण अनेक समस्या बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा एमसीडी से जुड़ी वर्षों पुरानी लंबित दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्टों को लागू कराना है। एमसीडी का जोर चौथे और पांचवें दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर है। यह रिपोर्टें आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में पेश की गई थीं, लेकिन उन पर अब तक अमल नहीं हुआ।
इन सिफारिशों के लागू होने से एमसीडी को दिल्ली सरकार से मिलने वाले टैक्स हिस्से में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे उसको अपने संसाधन मजबूत करने में मदद मिलेगी। आप सरकार ने इन रिपोर्टों को केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट और वित्तीय सहायता न मिलने का हवाला देते हुए लंबित रखा था।
भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों का कहना है कि अब जब केंद्र, दिल्ली और एमसीडी में एक ही पार्टी की सरकार है, तो इन रिपोर्टों को लागू कराने का यह सही समय है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान यह रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था।
1260 सड़कों को दिल्ली सरकार से वापस लेने की भी की जाएगी मांग
नई दिल्ली। एमसीडी उन 60 फुट से अधिक चौड़ी 1260 सड़कों को भी वापस लेने की मांग उठाएगी जो लगभग 14 साल पहले कांग्रेस के शासन के दौरान दिल्ली सरकार ने अपने अधीन ले ली थीं। साथ ही, एमसीडी यह भी मांग करेगी कि दिल्ली सरकार से उसे मिलने वाला अनुदान तिमाही की समाप्ति पर नहीं, बल्कि तिमाही की शुरुआत में दिया जाए। मौजूदा व्यवस्था के चलते एमसीडी को फंड मिलने में देरी होती है जिससे वित्तीय संकट गहराता है और बुनियादी सेवाएं प्रभावित होती हैं।
वन टाइम पार्किंग चार्ज और टैक्स दरों में बदलाव की मांग
वर्तमान में नए वाहन रजिस्ट्रेशन पर एमसीडी वन टाइम पार्किंग शुल्क लेती है, जो वर्षों से अपरिवर्तित है। बढ़ती गाड़ियों और पार्किंग संकट को देखते हुए चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसी तरह सिनेमा, मल्टीप्लेक्स और अन्य व्यावसायिक संस्थानों से मिलने वाला टैक्स भी रिवाइज किया जा सकता है। एमसीडी का तर्क है कि वर्तमान दरें वर्षों पुरानी हैं और मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप इनमें संशोधन आवश्यक है। इस संबंध प्रस्ताव दिल्ली सरकार के पास मंजूरी के लिए लंबित पड़े हैं।
दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्टों में सिफारिश
चौथे और पांचवें दिल्ली वित्त आयोग ने एमसीडी के वित्तीय अधिकार बढ़ाने की सिफारिश की थी। उनमें दिल्ली सरकार से टैक्स शेयर में वृद्धि, स्थायी फंडिंग मॉडल और संसाधनों का पुनर्वितरण सुझाया गया था।
एमसीडी को अभी दिल्ली सरकार से फंड तिमाही खत्म होने के समय मिलता है। एमसीडी चाहती है कि यह राशि तिमाही की शुरुआत में दी जाए ताकि वर्किंग कैपिटल का संकट न हो। फंडिंग में देरी के कारण कई बार सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सेवाएं प्रभावित होती हैं।