अशक्त बच्चों के अभिभावकों के लिए खुशखबरी है। ऐसे बच्चों की शिक्षा के लिए अब उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा। न ही एक स्कूल से दूसरे स्कूल तक प्रवेश के लिए चक्कर लगाने की जरूरत होगी, क्योंकि ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए मास्टर साहब को जल्द ही घर-घर जाना पड़ेगा।
कितने शिक्षक घरों पर भेजे जाएंगे और वह कितने घंटे पढ़ाएंगे, अभी यह तय नहीं हुआ है। जन्म से चलने-फिरने, बोलने, सुनने में असमर्थ और दिमागी रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है।
स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे बच्चों की पढ़ाई के लिए सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत एक योजना शुरू की गई है।
जिले में दो केंद्रों, एनआईटी पांच स्थित राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और बल्लभगढ़ स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अनुबंध के आधार पर अशक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को लगाया गया है।
अभी तक इन केंद्रों पर मूक, बधिर, अंध, मंद बुद्धि व पोलियो ग्रस्त बच्चों को पढ़ाने के लिए बुलाया जाता रहा है, लेकिन इस बार से शारीरिक रूप से बहुत अधिक अशक्त एवं बेड पर पड़े रहने वालों को भी पढ़ाने के लिए कहा गया है।
इन्हें पढ़ाने के लिए सेंटर पर तैनात शिक्षकों को उनके घर पर जाना पड़ेगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि शिक्षा का अधिकार ऐसे बच्चों के लिए भी उतना ही जरूरी है, जितना अन्य बच्चों के लिए।
सर्व शिक्षा अभियान जिला परियोजना संयोजक डीसी चौधरी ने बताया कि मौजूदा शैक्षिक सत्र से ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने को कहा गया है, जो केंद्रों तक चलकर भी नहीं आ सकते हैं, उनकी तलाश कर पढ़ाई करवाई जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को ऐसे बच्चों के घर भेजा जाएगा।