फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एम्स निदेशक की सलाहः अब लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत, शहरों के हिसाब से बने रणनीति

Sun, 31 May 2020 05:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, कंटेनमेंट जोन पर जरूरी है फोकस
  • नहीं बरती सावधानी तो कोरोना की भयावह स्थिति से इंकार नहीं 
  • भारत जून से जुलाई के बीच कोरोना का पीक देख सकता है
विज्ञापन
डॉक्टर रमदीप गुलेरिया (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना वायरस को लेकर अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना का पीक भले ही भारत में अब तक नहीं आया है लेकिन अब जब लॉकडाउन से बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में अलग अलग शहरों के लिए रणनीति बनाने की जरूरत है। साथ ही लोगों को और भी ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह कहना है दिल्ली एम्स के निदशेक डॉ. रणदीप गुलेरिया का। इससे पहले भी डॉ. गुलेरिया ने कहा था कि भारत जून से जुलाई के बीच कोरोना का पीक देख सकता है।

विज्ञापन


शनिवार को डॉ. गुलेरिया ने कहा कि संकरी गलियां, शहरों में छोटे घर या फ्लैट की वजह से ज्यादा लोगों तक वायरस पहुंचने का डर रहता है। इन जगहों पर अगर एक भी संक्रमित मरीज घूमता है तो वह कई लोगों को वायरस दे सकता है।

उन्होंने कहा कि देश के बड़े शहरों में 70 से 80 फीसदी तक केस सामने आ रहे हैं। यहां की समस्याएं बाकी हिस्सों से अलग हैं। यहां झुग्गी के अलावा कॉमन टॉयलेट इत्यादि हैं। घनी आबादी के चलते इन शहरों वायरस का खतरा ज्यादा है। अलग अलग समाधान तलाशने की आवश्यकता है जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग, चेहरे पर मास्क लगाना और बार बार हाथ धोने की आदत जरूरी है।
विज्ञापन


डॉ. गुलेरिया ने कहा कि जिस फेस में अब भारत पहुंच रहा है उसमें ज्यादा सतर्कता जरूरी है। ऑफिस, मॉल भी खुलने वाले हैं। ऐसे में केस भी बढ़ेंगे और अस्पतालों में बिस्तर भी भरने लगेंगे। ऐसे में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो आने वाला दौर भयावह हो सकता है।

एम्स में स्वास्थ्य कर्मचारी बाहर से संक्रमित होकर आ रहे
एम्स निदेशक ने कहा कि कोरोना की चपेट में आ रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों की देखरेख करना बहुत जरूरी है। हालांकि एम्स में 206 में से तीन या चार लोग ही कोविड उपचार में शामिल थे। बाकी स्वास्थ्य कर्मचारी समाज के बाकी लोगों की तरह बाहर से संक्त्रस्मित होकर अस्पताल आ रहे हैं। नॉन कोविड क्षेत्रों में लापरवाही करने से इस तरह की चुनौती देखने को मिल रही है।

हर किसी को संक्रमित समझते हुए करें बचाव
डॉ. गुलेरिया का कहना है कि जिन लोगों में लक्षण नहीं मिल रहे हैं उनकी पहचान करना बहुत मुश्किल है। इसलिए सभी लोगों को बिना लक्षण वाला कोरोना संक्रमित मरीज समझते हुए सतर्कता बरतें। तभी अपना और परिवार की सुरक्षा कर सकते हैं। फिर चाहे वह घर में हो या फिर ऑफिस में। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें