- आईवीएफ मीडिया, क्रायोप्रिजर्वेशन मीडिया, रिएजेंट्स और आईवीएफ प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली अन्य लैब सामग्री पर लागू होगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नया निर्देश जारी किया है। अब केवल वही फर्टिलिटी क्लीनिक और शुक्राणु बैंक इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से जुड़ी जरूरी सामग्री खरीद सकेंगे, जो असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) अधिनियम, 2021 और सरोगेसी अधिनियम, 2021 के तहत पंजीकृत हैं। यह निर्देश आईवीएफ मीडिया, क्रायोप्रिजर्वेशन मीडिया, रिएजेंट्स और आईवीएफ प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली अन्य लैब सामग्री पर लागू होगा। इनका उपयोग अंडाणु, शुक्राणु और भ्रूण को सुरक्षित रखने और विकसित करने के लिए किया जाता है।
सीडीएससीओ के अधिकारी ने बताया कि उसके संज्ञान में आया था कि आईवीएफ में इस्तेमाल होने वाली लैब सामग्री बिना पंजीकरण वाले केंद्रों को भी बेची जा रही थी। सीडीएससीओ के अनुसार, ये सभी उत्पाद मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017 के तहत मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में आते हैं। इनके निर्माण और आयात के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। संगठन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग अधिकारियों, निर्माताओं, आयातकों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि आईवीएफ से जुड़ी सामग्री की आपूर्ति केवल पंजीकृत फर्टिलिटी क्लीनिक और शुक्राणु बैंकों को ही की जाए।