दिल्ली-एनसीआर में यदि वायु गुणवत्ता फिर आपात स्थिति पर पहुंचती है, तो अगली बार दिल्ली ही नहीं उसके आसपास के एनसीआर के शहरी इलाकों में भी सम-विषम योजना बिना छूट के साथ लागू होगी।
दिल्ली के अलावा फिलहाल नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद शहरों में सम-विषम योजना लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने यह आदेश दिया है।
ईपीसीए ने शुक्रवार को बैठक के बाद कहा कि सम-विषम को प्रभावी बनाने के लिए बीजिंग और पैरिस जैसे शहर के अनुभवों और नियमों का तुलनात्मक अध्ययन कर एक नियमावली (मैनुअल) भी बनाई जाएगी। इस संबंध में अगले सप्ताह ईपीसीए की बैठक होगी।
इसमें महिलाओं और दोपहिया वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी
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ईपीसीए ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के हालिया आदेश को ही आधार बनाकर कहा है कि हवा की आपात स्थिति के दौरान सम-विषम स्वत: लागू होगा और इसमें महिलाओं और दोपहिया वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी।
ईपीसीए ने संबंधित राज्यों और प्राधिकरणों को अपने आदेश में कहा है कि अब ग्रैप में तय कदमों को लागू करने को लेकर किसी तरह की ऊहापोह और वाद-विवाद नहीं होना चाहिए। यदि सम-विषम योजना लागू करने की परिस्थिति आती है, तो सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को ही छूट दी जाएगी।
इससे पहले दिल्ली और अन्य सभी संबंधित राज्यों को सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाने के लिए भी कहा गया है। बैठक के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारी ने जानकारी दी कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होने की बजाय बहुत खराब श्रेणी में फिर चली गई है।
साल के अंत तक नई बसें
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बैठक के दौरान हरियाणा सरकार के प्रतिनिधि ने बताया कि गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए 500 अतिरिक्त बसें खरीदी जा रही हैं। इसमें 100 इलेक्ट्रिक और 400 सीएनजी बसें होंगी। वहीं दिल्ली और नोएडा परिवहन विभाग ने भी इस वर्ष के अंत तक कुछ और नई बसें खरीदने का मन बनाया है।
सात दिन पहले मौसम विभाग को अलर्ट देने का आदेश
ईपीसीए ने मौसम विभाग को भी अपने आदेश में कहा है कि वह अपने फोरकास्टिंग सूचना तंत्र को और मजबूत बनाए। वहीं कम से कम पांच से सात दिन पूर्व हवा की इमरजेंसी और स्मॉग जैसी स्थिति की सूचना उन्हें मुहैया कराए। ईपीसीए ने कहा कि ताकि आईएमडी की सूचना के आधार पर दिल्ली-एनसीआर के संबंधित प्राधिकरणों को ग्रैप के आधार पर आदेश जारी किया जाए।
वहीं ईपीसीए ने सभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा है कि वह स्टोन क्रेशर जैसे प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के नामों की सूची बनाकर तैयार रखें। जब हवा की आपात स्थिति बनती है, तो अगले ठंडे मौसम में उन्हें आदेश देने में सहजता होगी।
पेट कोक के इस्तेमाल पर रोक का आदेश
ईपीसीए ने अपने आदेश में सभी तेल कंपनियों को कहा है कि वह अपने सभी डीलर्स की सूची उन्हें सौंपे। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि उनके जरिये फरनेस ऑयल और पेटकोक दिल्ली-एनसीआर के बाजार में न बिकने पाए।