फरीदाबाद के एक तरफ जहां प्रधानमंत्री देश-दुनिया के लोगों से ज्यादा से ज्यादा मिलकर रिश्ते सुधारने में लगे हैं वहीं उनके मंत्री को जनता से जुड़े सवालों पर भी बात करने के लिए समय नहीं है।
लोगों के बीच पहुंचना तो दूर समस्या बताने के लिए फोन पर भी लोगों को एडवांस बुकिंग करनी पड़ती है। मंत्रियों की जिस हिसाब से व्यस्तता दिखाई जा रही है, उसके हिसाब से काम नहीं होने से एक महीने में ही लोगों का सब्र जवाब देने लगा है।
आम जनता द्वारा चुनकर गद्दी पर बैठे भाजपा के मंत्रियों के पास उन्हीं की समस्या सुनने का वक्त नहीं है। मंत्रियों की इस अनदेखी पर खुद मुख्यमंत्री की भी पकड़ नहीं दिखाई दे रही। एक उदाहरणस्वरूप शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा से शिक्षा से जुडे़ सवाल का जवाब मांगने के लिए हफ्तेभर बाद भी बात नहीं हो पाई। पीड़ितों की मानें तो कभी उनके निजी सचिव तो कभी पीए फोन उठाते हैं।
न तो समस्या का समाधान मिलता है न ही मंत्री जी से बात हो पाती है। कुल मिलाकर जीत के बाद मंत्री जी ने व्यस्तता का हवाला देकर फोन उठाना छोड़ दिया। ऐसे में सवाल ये है कि किसी मुद्दे पर बात करने के लिए फोन कहां मिलाएं। कुछ लोगों का आरोप है कि समस्या आज हुई है तो मंत्री के निजी सचिव दो दिन बात फोन करने को कहते हैं।