सिसोदिया ने लिखा है कि एक आईएएस अधिकारी उपराज्यपाल के पास जाकर दावा करे कि मंत्री ने उसे डांटा तो उसके तमाम निकम्मेपन के बावजूद उसके आंसू पोंछे जाते हैं। उसे मंत्रियों की बैठक में नहीं शामिल होने को उकसाया जाता है।
सिसोदिया ने सलाह दी है कि पहले आईएएस अधिकारी रहे उपराज्यपाल अब चीजों को आईएएस के चश्मे से देखना बंद करें। वहीं, सवाल किया है कि रात 12 बजे अगर एक आंगनबाड़ी वर्कर उपराज्यपाल के दरवाजे पर कहने आए कि उसका तीन महीने से चूल्हा नहीं जला, तो वह क्या करेंगे।
दोषी अधिकारियों पर एफआईआर होगी या राजनिवास का सुरक्षा इंचार्ज थाने में फोन कर उसे हवालात में बंद करवाएगा। सिसोदिया के मुताबिक, उनकी लड़ाई राजनिवासों और सचिवालयों में बैठी व्यवस्था से है। आईएएस अधिकारियों से कोई लड़ाई नहीं है। इनमें से कुछ बहुत निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। इस धर्मयुद्ध का अंजाम तो समय ही तय करेगा।