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Delhi NCR News: अब दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के साथ सेहत का भी पाठ

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- दिल्ली के 75 सीएम श्री स्कूलों में 30 हजार बच्चों को मिलेगी फाउंडेशनल वेलबीइंग लिटरेसी की सीख
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-शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस पहल का शुभारंभ किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को सिर्फ पढऩा-लिखना और गिनती करना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की आदतें भी सिखाई जाएंगी। दिल्ली सरकार ने 75 सीएम श्री स्कूलों में ईट वेल-लिव वेल पहल की शुरुआत की है। इसके तहत करीब 30 हजार बच्चों को फाउंडेशनल वेलबीइंग लिटरेसी (एफएलडब्लयू) से जोड़ा जाएगा। इस पहल का शुभारंभ बृहस्पतिवार को शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में ऐसी आदतें और कौशल विकसित करना है, जो उन्हें स्वस्थ, जिम्मेदार और बेहतर जीवन जीने में मदद करें। इसमें बच्चों को खान-पान, स्वच्छता, पानी पीने, शारीरिक गतिविधि, भोजन के समय की अच्छी आदतों और मानसिक व सामाजिक स्वास्थ्य के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। पहल को आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन, लेडी इरविन कॉलेज और इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का भी सहयोग मिला है। कार्यक्रम इस सोच पर आधारित है कि जिस तरह फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (एफएलएन) बच्चों की पढ़ाई की बुनियाद मजबूत करता है, उसी तरह एफएलडब्लयू स्वस्थ जीवन जीने की समझ और कौशल विकसित करेगी।
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स्कूल के साथ परिवार भी जुड़ेगा
यह पहल केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें पूरे स्कूल के माहौल को बच्चों की सेहत से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। देखा जाएगा कि बच्चे क्या खाते हैं, भोजन की सुरक्षा और स्वच्छता का कितना ध्यान रखते हैं, पर्याप्त पानी पीते हैं या नहीं और शारीरिक गतिविधियों में कितना हिस्सा लेते हैं। अभिभावकों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा, ताकि स्कूल में सीखी गई अच्छी आदतें बच्चों के घर और परिवार तक पहुंच सकें।
21
व्यक्तिगत और 7-7 सामाजिक व पर्यावरणीय कौशल
ईट वेल-लिव वेल कार्यक्रम में 21 व्यक्तिगत आदतें 7 सामाजिक और 7 पर्यावरणीय कौशल शामिल किए गए हैं। बच्चों को अपनी देखभाल के साथ-साथ दूसरों और पर्यावरण की देखभाल के लिए भी तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम के लिए न तो कोई अतिरिक्त पाठ्यपुस्तक होगी और न ही परीक्षा। बच्चों को छोटी बातचीत, गतिविधियों, दृश्य संकेतों और नियमित अभ्यास के जरिये स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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विभिन्न गतिविधियों को जोड़कर स्कूल का हिस्सा बनाया जाएगा
शिक्षा निदेशक अंकिता आनंद ने कहा कि इसका उद्देश्य स्कूलों पर कोई नया बोझ डालना नहीं है। पहले से चल रही विभिन्न गतिविधियों को एक साथ जोड़कर वेलबीइंग को स्कूल जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा।
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