समय सुबह 9:30 बजे
सुबह से ही मेट्रो स्टेशन के बाहर यात्रियों की लंबी लाइन लग गई थी। इसको देखते हुए मेट्रो का अतिरिक्त स्टाफ स्टेशन के बाहर मौजूद था। बारी- बारी कर यात्रियों को मेट्रो स्टेशन में प्रवेश दिया जा रहा था। लाइन में शारीरिक दूरी का पालन करने के लिए स्टेशन से करीब 100 मीटर की दूरी तक लाल रंग की लकीरें खींची गई थी। इसी तरह की लकीरें मेट्रो स्टेशन के अंदर भी बनाई गई थी।
मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों को कॉविड प्रोटोकॉल के तहत प्रवेश दिया जा रहा था। इसके तहत पहले चरण में लोगों के बीच शीरीरिक दूरी बनाई गई थी, दूसरे चरण में यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही थी। जिन यात्रियों का तापमान सामान्य से कुछ अधिक आ रहा था उन्हें थोड़ी देर के लिए ठहरने के बाद फिर से जांचा जा रहा था। तीसरे चरण में यात्रियों के सामान को सैनिटाइज किया जा रहा था। वहीं, चौथे चरण में यात्रियों के हाथों को सैनिटाइज करने की भी व्यवस्था की गई थी। इसके बाद यात्रियों की जांच कर उन्हें मेट्रो स्टेशन में प्रवेश दिया जा रहा था।
कार्ड रिचार्ज के लिए लगी रही लंबी लाइन
कोरोना को देखते हुए मेट्रो में फिलहाल टोकन से यात्रा की अनुमति नहीं है। वहीं, कुछ यात्रियों के कार्ड में रुपये मौजूद नहीं थे। यही वजह रही कि मेट्रो स्टेशन में प्रवेश करने के बाद अधिकतर यात्रियों को कार्ड रिचार्ज कराने के लिए भी लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ा। कैश की सुविधा न होने की वजह से कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में कुछ यातज्री ऐसे भी दिखाई दिए जिन्होंने अपने जानकारों को फोन कर यूपीआई के माध्यम से मेट्रो कार्ड को रिचार्ज करा मेट्रो का सफर का किया।
समय : सुबह 9.45 बजे
वृहस्पतिवार सुबह सात बजे से वायलट लाइन मेट्रो भी लोगों की सेवा में तत्पर हो गई। लेकिन अभी मेट्रो को सवारियां नहीं मिल रही हैं। सुबह लगभग पौने 10 बजे थे, लेकिन मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन बिल्कुल खाली दिख रहा था। मेट्रो स्टेशन के बाहर सन्नाटे जैसा माहौल था। जबकि अंदर भी कम लोग ही दिखाई दे रहे थे। सामान्य दिनों में खचाखच भीड़ से भरा रहने वाला मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन वृहस्पतिवार को खाली दिख रहा था। यहां बड़ी संख्या में ब्लू लाइन और वायलेट लाइन मेट्रो के यात्री ट्रेनों की अदला बदली करते हैं। लेकिन वृहस्पतिवार को मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के भीतर जाने वाले यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। वहीं मेट्रो से बाहर आने वालों की संख्या भी बेहद कम थी। मेट्रो में जाने वालों से अधिक लोग मंडी हाउस बस स्टैंड पर नजर आ रहे थे।
ऑटो वालों को नहीं मिल रही सवारी
मेट्रो बंद थी तो लंबी दूरी की सवारियां मिलती थीं। लेकिन जब से मेट्रो चलना शुरू हुई है, तो शहर में 30-40 रूपए से ऊपर की सवारियां मिलनी बंद हो गई हैं। - पिंकू, ऑटो चालक
सुबह से खड़े हैं लेकिन यवारियां नहीं मिल रही हैं। मेट्रो नहीं चल रही थी तो लोग घर से निकलकर ऑटो ढूंढते थे। अब लोग केवल मेट्रो स्टेशन तक ऑटो ले रहे हैं, अब लौटने की सवारी नहीं मिल रही है।
-दिनेश, ऑटो चालक
लोगों ने कहा...
काफी समय बाद रेड लाइन में सफर करने का अवसर मिल रहा है। बसों में सफर करके परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में मेट्रो चलसे अब फिर से सुविधा हुई है।
-सीमा
दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन व्यस्त लाइनों में शुमार है। कोरोना से पहले मैं प्रतिदिन इसी लाइन से सफर करता था। अब यह सुविधा दोबारा नई व्यवस्था के साथ मिल रही है।
-संजीव
मेट्रो न चलने के कारण बसों में धक्के खाने पड़ते थे। वहीं, संक्रमण का डर भी कहीं ज्यादा अधिक था। हालांकि, यहां कोरोना के प्रोटोकॉल के साथ यात्रियों को प्रवेश दिया जा रहा है जो सराहनीय है।
विनय
मेट्रो में यदि सुरक्षा के साथ सफर किया जाए तो कोई हर्ज नहीं है। यही वजह है कि मैंने भी मेट्रो के सफर को प्राथमिकता दी है। अब बार-बार बस बदलने की परेशानी भी नहीं होगी।
-सचिन