काम के घंटों के दौरान अपने कार्य क्षेत्र से बाहर रहने और ड्यूटी के दौरान अपने काम को छोड़कर दूसरे काम करने वाले कर्मचारी से निपटने के लिए अब नियोक्ता अपने कर्मचारियों की पल-पल की खबर रखने वाली तकनीक पर अमल कर रहे हैं। यह सुविधा जियो फेंसिंग के आने से संभव हुई है, जिस पर अब देश के कुछ नगर निगम अमल करने लगे हैं जबकि कुछ ने ऐसा करना तय कर लिया है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान को शुरू हुए कई साल बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो पायी है। इन शहरों में जब समस्या की तह में जाकर देखा गया, तो पता चला कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी कार्य अवधि में अपने काम की जगह पर नहीं बल्कि इधर-उधर पाये जाते हैं। यही नहीं, ड्यूटी के दौरान जिस इलाके में सफाई का काम सौंपा गया है, वे वहां होते भी हैं तो काम नहीं करते बल्कि सुस्ताते रहते हैं। ऐसे ही कर्मचारियों पर लगाम लगाने के लिए मंत्रालय को नगर निगम के सभी वार्डों या उसके हिस्सों का जियो फेंसिंग कराने का सुझाव दिया गया था। इस तरह की जियो फेंसिंग महाराष्ट्र के तीन नगर निगमों पुणे, ठाणे और नागपुर में शुरू भी हो चुकी है।
क्या है जियो फेंसिंग?
जियो फेंसिंग उपग्रह की सहायता से किसी इलाके को चिन्हित करने की तकनीक है। ऐसा होने के बाद उससे जुड़ा उपकरण लेकर कोई व्यक्ति उस इलाके में जाएगा तो कंप्यूटर पर उसकी लोकेशन मिलती रहेगी। वह व्यक्ति बैठा है या सफाई कर रहा है, इसकी भी जानकारी मिल जाएगी। यदि वह अपने तय इलाके से बाहर निकला, तो भी उनके बॉस को इसकी जानकारी मिल जाएगी। ऐसी ही तकनीक के आधार पर रेलवे ने अपने पटरियों की जियो फेंसिंग कराई हुई है, इससे कोई व्यक्ति यदि रेल की पटरी के 20 मीटर के दायरे में होगा तो उसे पता चल जाएगा। इसी के सहारे रेलवे ने मोबाइल एप के जरिए अनरिजर्व टिकटिंग सिस्टम शुरू किया है। इस प्रणाली में रेलवे का जनरल टिकट तभी मोबाइल फोन से कट सकेगा, जब व्यक्ति पटरी या रेलवे स्टेशन से 20 मीटर की दूरी पर होगा। इसी तकनीक का उपयोग अब नगरपालिका में होना शुरू हुआ है। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईटीआई लिमिटेड से समझौता किया गया है।
मेरठ और लखनऊ नगर निगमों में होगी ऐसी व्यवस्था
अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मेरठ और लखनऊ नगर निगम ने आईटीआई से इस बारे में सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इन दोनों नगर निगमों में शीघ्र ही जियो फेंसिंग कर दी जाएगी। ऐसा करने के बाद सभी कर्मचारियों को एक स्मार्ट वाच दी जाएगी, जिसमें जीपीएस का उपकरण लगा होगा। इसे पहनकर अपने इलाके में काम शुरू करते ही उसकी ड्यूटी शुरू हो जाएगी। यदि कोई कर्मचारी धोखा देने के लिए इसे नहीं पहनता है तो उसे अनुपस्थित मान लिया जाएगा। यह काम कंप्यूटर खुद ब खुद करेगा। अधिकारी के अनुसार देश के अन्य नगर निगमों को भी ऐसा करने को कहा गया है, ताकि स्वच्छ भारत अभियान पर सही तरीके से अमल हो सके।
काम के जगह से बाहर निकले कि बॉस को होगी इत्तला
काम के घंटों के दौरान अपने कार्य क्षेत्र से बाहर रहने और ड्यूटी के दौरान अपने काम को छोड़ कर दूसरे काम करने वाले कर्मचारी सुधर जाएं। क्योंकि अब नियोक्ता ऐसी तकनीक पर अमल करने लगे हैं, जिससे उन्हें अपने कर्मचारियों की पल-पल की खबर होगी। ऐसी संभव हो पाया जियो फेंसिंग से, जिस पर अब देश के कुछ नगर निगम अमल करने लगे हैं जबकि कुछ ने ऐसा करना तय कर लिया है। इनमें ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ और मेरठ नगर निगम भी शामिल हैं।
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान को शुरू हुए कई साल बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो पायी है। इन शहरों में जब समस्या की तह में जाकर देखा गया तो पता चला कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी कार्य अवधि में अपने काम के जगह पर नहीं बल्कि इधर-उधर पाये जाते हैं। यही नहीं, काम के समय में जिस इलाके में सफाई का काम सौंपा गया है, वे वहां होते भी हैं तो काम नहीं करते बल्कि सुस्ताते रहते हैं। ऐसे ही कर्मचारियों पर लगाम लगाने के लिए उन्हें नगर निगम के सभी वार्डों या उसके हिस्सों का जियो फेंसिंग कराने का सुझाव दिया गया था। इस तरह की जिओ फेंसिंग महाराष्ट्र के तीन नगर निगमों -पुणे, ठाणे और नागपुर में शुरू भी हो चुकी है।