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यादव सिंह संग बड़े ठेकेदारों पर भी कसा CBI का शिकंजा

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सीबीआई ने यादव सिंह के समय में ठेका पाने वाली बड़ी कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब तक तीन बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों को आवंटित कार्यों का ब्योरा मांग चुकी है।
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सीबीआई अपनी जांच में यादव सिंह के 2007 से 2012 तक के कार्यकाल पर ज्यादा फोकस कर रही है। यादव सिंह इसी दौरान सीएमई जल से लेकर इंजीनियर इन चीफ के पद तक पहुंचे।

उनके जरिये सबसे ज्यादा टेंडर इसी दौरान जारी हुए हैं। यही वजह है कि सीबीआई यादव सिंह के इस कार्यकाल को खंगालने में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले हफ्ते दो कंपनियों तिरुपति और जेएसपी कंस्ट्रक्शन को 2007 से 2012 तक की अवधि में जारी ठेकों का विवरण मांगा गया है।
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एजेंसी ने तीन कंपनियों का ब्योरा मांगा

इन कंपनियों को कौन-कौन से काम दिए गए, प्रोजेक्ट की लागत क्या थी, इन कंपनियों ने कितने में काम किया है, टेंडर आवंटन की प्रक्रिया आदि जानकारी मांग गई थी,जो भेज दी गई है।

सूत्र बताते हैं कि जेएसपी कंस्ट्रक्शन को करीब नौ ठेके दिए गए हैं। इसी तरह तिरुपति को भी बिजली के कई ठेके मिले हैं। सीबीआई ने मंगलवार को एनकेजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को 2007-2012 के बीच दिए गए ठेकों का भी ब्योरा मांगा।

इस कंपनी को नोएडा में पहला ठेका यादव सिंह के समय में ही मिला है। इसी कंपनी ने सेक्टर-37 अंडरपास का भी निर्माण किया है। यमुना पर निर्माणाधीन पुल भी यही कंपनी बना रही है।
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75 ठेकेदारों की भेजी गई थी लिस्ट

इस कंपनी की रिपोर्ट भी दो दिन में बनाकर भेज दी जाएगी। आयकर छापे के बाद मिले साक्ष्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्राधिकरण से ठेकेदारों की ब्योरा मांगा था, जिसमें 75 ठेकेदारों की सूची भेजी गई थी।

सीबीआई इन सभी को खंगाल सकती है। बता दें कि इससे पहले प्राधिकरण ने आयकर की जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें यादव सिंह के जरिये 2003 से 2014 तक कुल 13081 टेंडर की सूची थी, जिसमें सिविल और मेंनटेनेंस के कार्यों के 3562 टेंडर हैं।

इनकी कीमत 1641 करोड़ रुपये है, जबकि जल, सीवर और बिजली आदि के 9519 टेंडर जारी किए गए, जिनकी कीमत 2547.33 करोड़ रुपये है।
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