देश की राजधानी होने के बाद भी यहां अब तक राज्य मानवाधिकार की स्थापना नहीं हुई, जबकि तकरीबन हर राज्य में मानवाधिकार आयोग है। एक जनहित याचिका दायर कर राजधानी में राज्य मानवाधिकार आयोग बनाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है। यह नोटिस अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा की जनहित याचिका पर जारी किया गया है।
पेश जनहित याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना के लिए मानवाधिकार संरक्षण कानून 1993 के तहत न कोई अधिसूचना जारी की है और न इसकी स्थापना के लिए कोई कदम उठाया है।
याची ने अधिवक्ता पायल बहल के जरिए दायर याचिका में कहा है कि राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना नहीं करना मानवाधिकारों, सम्मान, गरिमा की रक्षा करने और इसके कायम रखने में सरकार की नाकामी को दिखाता है। देश की राजधानी होने के बाद भी यहां के निवासियों की मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की सुनवाई के लिए कोई आयोग नहीं है।