मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अधीक्षण की पूर्ण शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है। विशेष रूप से, उन्होंने भारतीय वायुयान अधिनियम की धारा 5 का उल्लेख किया, जो नागरिक विमानन सुरक्षा से संबंधित मामलों के संबंध में विनियामक और निरीक्षण कार्यों को करने की शक्ति नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो को प्रदान करती है।
मेहता ने कहा कि इन कंपनियों के पास महत्वपूर्ण एयरपोर्ट और यात्री डेटा तक पहुंच है। कंप्यूटर डेटा है जिसमें वीआईपी विवरण भी शामिल है, कौन सा विमान उतर रहा है आदि। उनके पास इन सभी विवरणों तक पूरी पहुंच है। सेलेबी के इस तर्क पर कि सुरक्षा मंजूरी रद्द करने से पहले सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया, मेहता ने कहा कि कभी-कभी ऐसा करने से कदम का उद्देश्य विफल हो सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार दोपहर को होगी।
न्यायमूर्ति दत्ता ने सेलेबी की तरफ से पेश मुकुल रोहतगी से पूछा कि क्या कानूनन उन्हें सामग्री प्रदान करना अनिवार्य है। रोहतगी ने जवाब दिया कि वह कारणों की प्रति नहीं मांग रहे, बल्कि उचित सुनवाई का अवसर और नोटिस की मांग कर रहे हैं। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी प्रतिनिधित्व किया।