लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाने वाले 22 प्रत्याशी नोटा के बराबर वोट भी नहीं हासिल कर सके। इनमें से 13 प्रत्याशी तो पांच सौ वोटों का आंकड़ा नहीं छू सके, जबकि तीन प्रत्याशियों को एक हजार से कम ही वोट मिले। बाकी प्रत्याशियों ने चार अंकों में वोट तो पाए, मगर नोटा से ज्यादा मत हासिल नहीं कर सके। जिले में 4984 मतदाताओं ने इन प्रत्याशियों से बेहतर नोटा को माना।
फरीदाबाद के इतिहास में सर्वाधिक 6,38,239 मतों की जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले कृष्णपाल गुर्जर के साथ ही कांग्रेस, इनेलो-बसपा, आप सहित कई अन्य क्षेत्रीय दल और निर्दलीय प्रत्याशी भी भाग्य आजमा रहे थे। इनमें सिर्फ कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना ही दो लाख से अधिक वोट पा सके, अन्य पार्टियों के उम्मीदवार एक लाख का भी आंकड़ा नहीं छू सके। जिले में 4984 वोट नोटा मेें डाले गए। इसके मुकाबले 12 प्रत्याशी 500 से भी कम मत पा सके।
इनमें आरपीआई के बुद्धाचार्य खजान सिंह 463, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के चौधरी दयाचंद 339, आरक्षण विरोधी पार्टी के दीपक गौड़ 471, टोला पार्टी के प्रदीप कुमार 330, राष्ट्रीय विकास पार्टी के महेश प्रताप शर्मा 477, लोकप्रिय समाज पार्टी के महेश कुमार सिंह 478, आपकी अपनी पार्टी (पीपल्स) के राकेश कुमार 451 वोट हासिल कर सके।
इनके अलावा निर्दलीय अमित सिंह पटेल को 371, टीकाराम हुड्डा को 249, बॉबी कटारिया को 393, मनोज चौधरी को 439, सीए शुक्ला को 389 मत हासिल हुए। तीन प्रत्याशी 1000 का आंकड़ा भी नहीं छू सके। इनमें आदिम भारतीय दल के एडवोकेट हरिशंकर राजवंश 718, संजय मोर्या 802 , डा. केपी सिंह को 665 वोट पा सके।
एक हजार से अधिक लेकिन नोटा से कम वोट पाने वालों में आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक पार्टी के रामकिशन गोला (1131), हिंद कांग्रेस पार्टी की रूबी (1192), बहुजन मुक्ति पार्टी के लेखराम दबंग (4773) भारतीय किसान पार्टी के विजेंद्र कसाना (2688) राष्ट्रीय लोकस्वराज पार्टी के प्रत्याशी श्यामवीर (3961) और वोटर्स पार्टी के सहीराम रावत (2024) रहे।