-चारों पदों पर 23,942 छात्रों ने दबाया नोटा, कई सीटों पर जीत के अंतर से कहीं अधिक रहे वोट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डूसू चुनाव में नोटा (इनमें से कोई नहीं) ने कई प्रमुख सीटों के चुनावी गणित पर असर डालने की संभावनाएं पैदा की हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर कुल 23942 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना। इन सभी सीटों पर नोटा को मिले मत विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच जीत के अंतर से अधिक रहे।
अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले और जीत का अंतर 2,053 रहा, जबकि नोटा को 4,310 मत मिले। सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी 21,650 वोट के साथ विजेता रहीं। एनएसयूआई की नम्रता को 14,869 वोट मिले और अंतर 6,781 रहा। इस पद पर नोटा को 7,884 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर नोटा के पक्ष में 4,359 और संयुक्त सचिव पद पर 7,389 वोट पड़े। संयुक्त सचिव पद पर आइसा-एसएफआई को 5,837 वोट मिले। चारों पदों पर वाम संगठनों को कुल 22,331 वोट मिले, जो नोटा के कुल मतों- 23,942 से कम रहे।
2016 से बढ़ा नोटा का दायरा
डूसू चुनाव में 2016 में पहली बार नोटा का विकल्प शामिल हुआ था। उस वर्ष 17,712 छात्रों ने इसका इस्तेमाल किया। 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 29,765, 2018 में 27,729 और 2019 में 27,576 रहा। कोरोना महामारी के कारण 2020 से 2022 तक चुनाव नहीं हुए। 2023 में नोटा के वोट घटकर 16,565 रह गए, लेकिन 2024 में बढ़कर 20,748 और 2025 में 23,674 हो गए।