वैज्ञानिक डॉक्टर वर्षा पोतदार के अनुसार, पॉजिटिव 57 लोगों में कफ प्रमुख लक्षण था। 48 लोगों में बुखार, 42 को गले में दर्द, 29 को जुकाम की परेशानी थी। संक्रमित में से 12 के सैंपल में एंटीवायरल और 31 के सैंपल में एंटीबायोटिक्स भी मिली है। बाहर से आने वाले लोगों में कोरोना के अलावा अन्य संक्रमण का पता लगाने के लिए यह अध्ययन किया गया था। अध्ययन के अनुसार, 22 जनवरी से 7 फरवरी तक लिए गए सैंपल सबसे ज्यादा संक्रमित मिले थे। नेशनल इन्फ्लूएंजा सेंटर सहित सात समूह में शामिल वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन पूरा किया है।
एहतियात न बरती जाए तो ये संक्रमण नुकसानदायक भी हो सकते हैं
यह मुख्य वायरस मिले लोगों में
इनफ्लुएंजा ए
25 यात्रियों में यह वायरस मिला है। इसे फ्लू नाम से भी जानते हैं। यह सीधे श्वसन तंत्र पर अटैक करता है। इसकी शुरुआत खासी, जुखाम और हल्के बुखार के साथ होती है। ध्यान ना दिया जाए तो यह बीमारी घातक रूप धारण कर लेती है।
इनफ्लुएंजा बी
ए की ही तरह इनफ्लुएंजा वायरस होता है जो कि 7 लोगों में मिला है। हालांकि की तुलना में यह वायरस मंद होता है।
मानव कोरोनावायरस
21 लोगों में यह वायरस मिला है। दुनिया में अब तक 7 तरह का कोरोनावायरस मिल चुका है। लेकिन अभी जो चल रहा है वह इससे अलग है।
राइनो वायरस
विदेशों से आए 15 लोगों में यह वायरस मिला है। कोविड-19 की तरह इसका असर भी 5 दिनों बाद दिखाई देता है। फ्लू जैसे ही लक्षण मिलते हैं।
एडिनो वायरस
चार लोगों में यह वायरस मिला है। इस वायरस के लक्षण भी सर्दी, जुकाम बुखार इत्यादि हैं। हालांकि सतर्कता बरतने से बचाव किया जा सकता है।
पैरा इनफ्लुएंजा (पीआईवी)
यह संक्रमण आमतौर पर सर्दियों में मिलता है। 10 लोगों में यह वायरस मिला है। इसके लक्षण भी अन्य तरह के फ्लू की भांति मिलते हैं।
आरएसवी
श्वसन से जुड़ा यह संक्रमण 6 लोगों में पाया गया। सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण शामिल हैं।
मैटानिमो
मानव मैटाफिनोमी वायरस दो लोगों में मिला है। यह ऊपरी या निचले श्वसन रोग का कारण बन सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर यह वायरस गंभीर रूप ले सकता है।