स्कूली बच्चों में पीठ दर्द 40 प्रतिशत बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्कूली बच्चों में पीठ दर्द और मांसपेशियों व हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (आईएपी) के विशेषज्ञों ने इसे चिंता का विषय बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए केवल भारी स्कूल बैग को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। लंबे समय तक बैठे रहना, मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत पोस्चर भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
यह बात 26 और 27 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में होने वाली वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 से पहले कही गईं। इस सम्मेलन में 32 देशों के 10 हजार से ज्यादा विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञों ने स्कूलों में कम उम्र से ही बच्चों को सही तरीके से बैठने, उठने और चलने-फिरने की जानकारी देने की जरूरत बताई है। उन्होंने नियमित व्यायाम और फिटनेस पर ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता
आयोजन सचिव रुचि वार्ष्णेय ने कहा कि बच्चों में पीठ दर्द को केवल भारी स्कूल बैग से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से चलने-फिरने, व्यायाम करने और शरीर को मजबूत व लचीला रखने की जानकारी देने को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष संजीव केझा ने बचपन से ही फिटनेस और सही गतिविधियों की आदत डालकर मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं से बचाव पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की पूरी जीवनशैली में सुधार की जरूरत है।