30वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की फोकस कंट्री चीन के शिल्पकार, कलाकार आधा मेला खत्म होने के बाद भी इस सांस्कृतिक कुंभ में नहीं पहुंचे हैं।
कुछ दिन पहले जो अधिकारी चीन के एक दो दिन में शिरकत करने के दावे कर रहे थे अब वह इस सवाल का जवाब भी नहीं दे रहे हैं। सूरजकुंड मेले को 2013 में अंतर्राष्ट्रीय रूप दिया गया।
इस साल से किसी एक देश को मेले का कंट्री पार्टनर बनाए जाने की परंपरा शुरू हुई। तीसवें अंतर्राष्ट्रीय मेले में चीन के साथ जापान दो देशों के शामिल होने से कंट्री पार्टनर का नाम बदल कर फोकस कंट्री कर दिया गया।
मेला शुरू होने से पहले मेला प्रशासन और प्रबंधन ने फोकस कंट्री चीन के कलाकार और शिल्पकारों के इस हस्तकला और संस्कृति के इस मंच पर शामिल होने का दावा किया था।
फोकस कंट्री निप्पोन यानी जापान के कलाकार शिल्पकार तो मेले में पहुंच गए लेकिन चीन ने अभी तक इस धरती पर अपनी आमद दर्ज नहीं कराई है।
मेला अधिकारी राजेश जून ने चीन के पहले दिन नहीं पहुंचने पर कहा था कि दिल्ली में कुछ कार्रवाई बाकी रह गई है दूसरे दिन सभी पहुंच जाएंगे। लेकिन आठ दिन बीतने के बाद भी कोई नहीं आया।