मणिपुर, असम, नगालैंड और त्रिपुरा से आए कारीगरों ने बुनाई परंपरा को खूबसूरती से किया प्रस्तुत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। वस्त्र मंत्रालय की ओर से जनपथ स्थित हैंडलूम हाउस में चल रही सूत्र का सफर प्रदर्शनी के पांचवें दिन पूर्वोत्तर राज्यों की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प ने लोगों का ध्यान खींच लिया। मणिपुर, असम, नगालैंड और त्रिपुरा से आए कारीगरों ने अपने क्षेत्र की समृद्ध बुनाई परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को खूबसूरती से प्रस्तुत किया है।
मणिपुर के स्टॉल पर सजे रंग-बिरंगे गमछे, साड़ियों और हस्तनिर्मित कपड़ों ने आगंतुकों को आकर्षित किया। वहां मौजूद कारीगरों ने बताया कि इन कपड़ों की खासियत इनके प्राकृतिक रंग और हाथ से की गई बुनाई है, जो इन्हें बाजार में विशेष पहचान देती है।
मणिपुर से आईं बुनकर सुनीवाला ने बताया कि इस प्रदर्शनी में शुद्ध कॉटन से बने गमछे लोगों को बेहद पसंद आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे गमछे पूरी तरह हाथ से बुने हुए हैं और इनकी खासियत यह है कि ये सौ प्रतिशत पानी को सोख लेते हैं। यह न केवल पारंपरिक उपयोग में काम आने वाला लोकप्रिय वस्त्र है।
इसके अलावा मणिपुर की पारंपरिक हमरंग साड़ी भी महिला आगंतुकों को खूब पसंद आ रही है। इसके डिजाइन और रंग संयोजन में स्थानीय संस्कृति की झलक साफ दिखती है। प्रदर्शनी में आए आगंतुकों का कहना है कि सूत्र का सफर न सिर्फ हस्तशिल्प की एक झलक है बल्कि यह भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से समझने का अवसर भी प्रदान कर रही है।
आयोजक का कहना है कि यह प्रदर्शनी भारतीय कारीगरों की मेहनत और धैर्य का जश्न है। इसमें विभिन्न राज्यों की हैंडलूम, हस्तनिर्मित उत्पाद और सांस्कृतिक कहानियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जो कारीगरों की विरासत को उजागर करती हैं और त्योहारों के मौके पर खरीदारी के लिए बेहतर अवसर प्रदान करती हैं।
प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के बुनकर अपनी पारंपरिक साड़ियां, सूट-दुपट्टा सेट, शॉल, बेडशीट्स, होम फर्निशिंग्स, धोती और कुर्ते जैसे उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।