अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नॉन कोविड मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाने की सलाह दी जा रही है। आरोप है कि यहां आ रहे मरीजों को कोविड अस्पताल होने का हवाला देकर सर्जरी करने से मना किया जा रहा है।
साउथ एक्सटेंशन के रहने वाले अनिल रावत ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी रीढ़ की हड्डी में कुछ समस्या थी, जिसका इलाज पिछले आठ महीने से एम्स में चल रहा था। उनकी सर्जरी होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते यह टाल दी गई थी।
उन्होंने कहा कि मंगलवार को समस्या अचानक बढ़ गई। वह अपनी सर्जरी के लिए एम्स के आपातकालीन विभाग में गए तो उन्हें कोविड अस्पताल होने का हवाला देकर इलाज से मना कर दिया गया। अनिल का कहना है कि उनकी हालत फिलहाल ठीक नहीं है और सर्जरी की सख्त जरूरत है।
दरअसल, कोरोना वायरस का सिलसिला शुरू होते ही दिल्ली के अस्पतालों में पहले से तय ऑपरेशन रोक दिए गए थे। इसके चलते उन मरीजों की तकलीफ और भी ज्यादा बढ़ गई जिन्हें कोरोना संक्रमण नहीं है।
मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं किया जा सकता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निर्देश जारी करते हुए कहा था कि कोई भी अस्पताल इमरजेंसी में मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकता है। उन्होंने सभी अस्पतालों को यह भी आदेश दिया था कि प्रतिदिन ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों की संख्या, आइपीडी व इमरजेंसी में भर्ती किए गए मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी जाए।