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Noida News: उत्तर प्रदेश के युवा जर्मन भाषा में सीख रहे एबीसीडी

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उत्तर प्रदेश के युवा जर्मन भाषा में सीख रहे एबीसीडी
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-ओपन एजुकेशन में जर्मन भाषा में पढ़ाई के लिए आ रहे सबसे ज्यादा आवेदन
-663 अभ्यार्थियों ने अन्य विदेशी भाषा में की पढ़ाई, 463 ने जर्मन में
- स्कूलों भी हिंदी छोड़कर विदेशी भाषा पढ़ने का बढ़ा चलन

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। उत्तर प्रदेश में ओपन स्कूल से पढ़ाई करने वाले अभ्यार्थी इंग्लिश के बाद सबसे ज्यादा जर्मन भाषा सीखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में विदेशी भाषाओं में सबसे ज्यादा अभ्यर्थियों ने जर्मन में पढ़ाई की है। वहीं, जिले में कोरियन कंपनी की संख्या बढ़ने से कोरियन भाषा सीखने वालों का आंकड़ा भी धीरे-धीरे बढ़ा है। इसमें से अधिकतर अभ्यर्थी नौकरी करने के साथ-साथ कोर्स भी कर रहे हैं।

नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, पूर्वी दिल्ली, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, संभल, सहारनपुर और शामली केंद्रों में विश्वविद्यालय की ओर से विदेशी भाषा में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, मास्टर डिग्री पर अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें 663 अभ्यर्थियों ने अलग-अलग विदेशी भाषा की पढ़ाई की, जिसमें से 463 ने जर्मन भाषा का कोर्स किया। बहुत कम ओपन यूनिवर्सिटी विदेशी भाषा के कोर्स संचालित कर रही है। अभ्यर्थियों को नियमित रूप से कॉलेज जाकर ही कोर्स करने पड़ रहे हैं। ओपन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने की वजह से छात्र काम करने के साथ पढ़ाई भी कर पा रहे हैं।
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सबसे ज्यादा अभ्यर्थियों ने सर्टिफिकेट इन जर्मन लैंग्वेज व डिप्लोमा इन टीचिंग जर्मन कोर्स किया है। धीरे-धीरे लैंग्वेज कोर्स के बारे में अभ्यर्थियों को पता चलेगा तो आवेदन और बढ़ेंगे।
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डॉ अमित चतुर्वेदी, वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक , इग्नू


हिंदी छोड़ फ्रेंच और जर्मन ले रहे छात्र

जिले में सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में 10 वीं में छात्रों के हिंदी अनिवार्य नहीं है। इस वजह से बड़ी संख्या में छात्र हिंदी को छोड़कर फ्रेंच व जर्मन समेत अन्य भाषा को विषय के तौर पर ले रहे हैं। जबकि 12 वीं में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में 12 वीं में 18225 छात्रों ने परीक्षा पास की, जिसमें से 7409 छात्रों ने ही हिंदी को विषय के तौर पर लिया था। सीबीएसई कॉर्डिनेटर व एमिटी स्कूल की प्रिंसिपल रेनू सिंह ने बताया कि 10 वीं में हिंदी अनिवार्य नहीं है। इसलिए 10 से 20 प्रतिशत छात्र विदेशी भाषा को विषय के तौर पर चुनाव कर रहे हैं। वहीं, 12 वीं में भी करीब 30 छात्र विदेशी भाषा ले रहे हैं।
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