चमड़े के टुकड़े, पिस्ता के शेल और रस्सी से तैयार की सुंदर ड्रेस
सेक्टर-24 स्थित भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन फुटवियर डिजाइिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट की अर्शिया ठाकुर ने फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन से हवाइन नाम ड्रेस तैयार की है। उन्होेने बताया कि इसमें उन्होने वेस्ट हुए चमड़े के टुकड़े, पिस्ता के शेल और रस्सी से सुंदर ड्रेस तैयार की है। फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा।
केमिकल रंगों को छोड़ इको-प्रिंटिंग से तैयार हो रहे प्राकृतिक कपड़े
एफडीडीआई की छात्रा अर्चिता सिंह ने कपड़े की प्राकृतिक रंगाई प्रक्रिया में कपास, रेशम, लिनन और ऊन जैसे प्राकृतिक रेशों का उपयोग किया है, जो पौधों के रंगों को आसानी से अवशोषित कर लेते हैं। खासतौर पर गुलाब, मैरीगोल्ड, नीलगिरी और कोरियोप्सिस जैसे फूलों का प्रयोग होता है, जो कपड़े को खूबसूरत रंग और डिजाइन प्रदान करते हैं।
शतरंज खिलाड़ी वंतिका युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं
नोएडा के सेक्टर-27 निवासी 22 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी वंतिका अग्रवाल के लिए भारत सरकार की ओर से अर्जुन पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई है। नौ वर्ष की आयु में एशियन स्कूल्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वंतिका ने 2024 में बुडापेस्ट में आयोजित 45वें शतरंज ओलंपियाड में भारतीय महिला टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता। उनकी अन्य उपलब्धियों में कॉमनवेल्थ, वर्ल्ड यूथ, एशियन यूथ और नेशनल चैंपियनशिप में पदक शामिल हैं।
जरूरतमंद बच्चों का भविष्य सुधार रही युवाओं की टीम-20
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, गलगोटिया, शारदा, लॉयड सहित कई कॉलेजों के 20 से अधिक छात्र झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को प्रतिदिन शाम को 4.30 से 6.30 बजे तक पढ़ा रहे हैं। सुहानी, कामाक्षी, आयुष ने बताया, वह घर-घर जाकर अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं। कई अभिभावक बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं होते थे। उनकी शिक्षकों की मदद से काउंसलिंग कराई जाती है। साधना, तनिषा, सरोज, निक्की, अरविंद, कुनाल ने बताया, घर से खर्च के लिए मिलने वाले रुपयों को जमा करके बच्चों की जरूरत का सामान खरीदते हैं। यदि उनके जेब खर्च के रुपयों से बच्चों का भविष्य बन सकता है तो वह इसे आगे भी करते रहेंगे।
दो साल से चल रही बच्चों की कक्षाएं
यशोधरा शिक्षा शिविर फाउंडेशन के डायरेक्टर पंकज मिश्रा ने बताया, दो साल से पढ़ाने का काम किया जा रहा है। उनका दाखिला पास के नजदीक स्कूलों में कराया जाता है। कई बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराया गया है। पढ़ाई के साथ ही मानसिक व शरीरिक विकास पर भी फोकस रखा जाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षक भी इन छात्रों को पढ़ाने के लिए आते हैं।
20 की उम्र में बच्चों को सिखा रहे निशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण
कराटे कोच गौरव 20 साल की उम्र में बच्चों को आत्मरक्षा के गुर सिखा रहे हैं। गौरव ने राज्य स्तर पर ओपन कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। विद्या भारती राज्य कराटे चैंपियनशिप में तीन बार स्वर्ण पदक जीता है। 2021 में गौरव ने शितो-रयू मार्शल आर्ट कराटे डू फेडरेशन से ब्लैक बेल्ट हासिल की। गौरव ने अभी तक 500 से अधिक बच्चो को निशुल्क कराटे सिखाया, साथ ही छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दे रहे हैं।