राजनीति के रथ पर सवार कुश्ती से युवा पहलवान चित
- ट्रायल के लिए गोंडा पहुंचते ही जिले के पहलवानों को लौटना पड़ा
- साल हुआ बर्बाद, नहीं हुईं जिला व प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिताएं
रणजीत मिश्रा
नोएडा। साल भर से राजनीति के रथ पर सवार भारतीय कुश्ती संघ के कारण युवा पहलवान चित हो रहे हैं। इस उठा-पटक में नए पहलवानों की पौध सूखने लगी है। इनका पूरा साल बर्बाद चला गया। दिसंबर में कुश्ती संघ के चुनाव संपन्न होने के बाद नए अध्यक्ष से कुछ बेहतर की उम्मीद दीं, लेकिन एक बार फिर पहलवानों का सपना चकनाचूर हो गया, जब खेल मंत्रालय ने रविवार को कुश्ती संघ को निलंबित कर दिया। इसके बाद ट्रायल के लिए गोंडा पहुंचे ही जिले के पहलवानों को बिना कुश्ती लड़े ही लौटना पड़ा।
इसी साल जनवरी में भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद पहलवानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। जो धीरे-धीरे दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया। अब कुश्ती संघ में नए अध्यक्ष की ताजपोशी के तीन दिन बाद ही खेल मंत्रालय ने संघ को निलंबित कर दिया। इससे न्याय मांग रहे अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को तो उम्मीद बंधी है, लेकिन युवा हताश हैं। जिले के पहलवानों ने बताया है कि गोंडा में 25 दिसंबर से राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता के लिए ट्रायल होने थे। गौतमबुद्धनगर से भी 10 से अधिक युवा पहलवान वहां ट्रायल देने गए थे। उनके गोंडा पहुंचते ही संघ निलंबित होने की खबर पहुंची। इसके बाद आयोजन निरस्त होने पर सभी पहलवानों को मायूस लौटना पड़ा। इससे पहले भी सालभर में जिला, मंडल व प्रदेश स्तरीय की कोई कुश्ती प्रतियोगिता नहीं हुई थी।
-
कोट :
खेल मंत्रालय के फैसले से कुश्ती को काफी नुकसान हुआ है। इस साल कोई भी कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित नहीं हुई। बिना प्रतियोगिता खेले ही पहलवान अगले आयु वर्ग में चले जाएंगे। इससे इनके प्रदर्शन का स्तर गिरेगा।
- रंजीत पहलवान, सह सचिव, जिला कुश्ती संघ गौतमबुद्धनगर।
संघ में राजनीति ने युवा पहलवानों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। नए अध्यक्ष की ताजपोशी से कुछ उम्मीदें जगी थी। जिले के कुछ पहलवान ट्रायल के लिए गोंडा गए थे, फिर उन्हें बिना खेले ही लौटना पड़ा।
- सुबोध पहलवान, अंतरराष्ट्रीय पहलवान व कोच सुखवीर अखाड़ा सरफाबाद।