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Noida News: लीज डीड के बाद भी निर्माण शुरू न करने पर देना होगा जवाब

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- यीडा सीईओ का कहना, आवंटियों को उत्पादन शुरू करने के लिए देनी होगी जानकारी
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- लीज डीड करा चुके सभी आवंटियों को प्राधिकरण को देना होगा फ्लो चार्ट
- मेडिकल डिवाइस पार्क के बाद टॉय और अपैरल पार्क की भी होगी समीक्षा

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यीडा अब ऐसे आवंटियों पर सख्ती करेगा जोकि लीज डीड होने के बाद भी निर्माण नहीं शुरु कराए हैं। ऐसे आवंटियों को नोटिस जारी कर उनसे फ्लो चार्ट प्राधिकरण को देने के लिए कहा जाएगा। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इसके लिए सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इसकी शुरुआत मेडिकल डिवाइस पार्क से होगी। इसके बाद टॉय पार्क, अपैरल पार्क, इलैक्ट्रॉनिक्स मेन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में आवंटन और निर्माण शुरु होने की समीक्षा सीईओ करेंगे।
सीईओ राकेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को बताया कि मेडिकल डिवाइस पार्क में 225 भूखंड विकसित किए गए हैं। कंपनियों की जरूरत के आधार पर यहां भूखंड के साइज को भी समायोजित करने का विकल्प रखा गया है। ऐसे में भूखंड की संख्या कम हो सकती है। इसमें से 116 का आवंटन प्राधिकरण से हो चुका है। वहीं, 46 की लीज डीड हो चुकी है। इसकी समीक्षा जब की गई तो पता चला कि इनमें से केवल 10 के ही बिल्डिंग प्लान अनुमोदित कराए गए हैं। वहीं मौके पर केवल छह ने ही निर्माण शुरु किया है। अधिकांश का निर्माण भी बहुत धीमा चल रहा है। यह पूरी परियोजना को ही देरी में बदल सकता है। इसके उलट प्रशासनिक और कॉमन सर्विस जैसी सुविधाएं यहां विकसित पहले ही हो चुकी हैं।
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सीएफ-1, सीएफ-2, सीएफ-3, सीएफ-4 जैसी सुविधाओं को 90 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है। सीईओ ने अधिकारियों से कहा है कि सभी ऐसे आवंटियों से फ्लो चार्ट मांगें जिनकी लीज डीड हो चुकी है। इस फ्लो चार्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कब कौनसा काम पूरा हो जाएगा। निर्माण पूरा होने और उत्पादन शुरु होने की जानकारी इसमें रहे। इन यूनिट के शुरु होने के बाद ही क्षेत्र के औद्योगिक विकाश और यहां स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का उद्देश्य पूरा हो सकेगा। इलैक्ट्रॉनिक्स मेन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की समीक्षा भी अब सीईओ करेंगे जिससे यहां सेमीकंडक्टर, मोबाइल उपकरण निर्माण जैसी दूसरी यूनिट शुरु हो सके।
इनसेट-
430 करोड़ रुपये इंफ्रा पर खर्च कर चुका यीडा
प्राधिकरण के मुताबिक मेडिकल डिवाइस पार्क के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए करीब 430 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से 100 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से अनुदान है। वहीं, बाकी बजट राज्य सरकार वहन कर रही है। इसका उद्देश्य यूपी में ही मेडिकल उपयोग के लिए जरूरी उपकरणों का निर्माण सुनिश्चित करना है।
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इनसेट-
अगली बारी टॉय व अपैरल पार्क की
सीईओ का कहना है कि यीडा क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए अलग-अलग क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टर को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक महायोजना में शामिल किया गया। इसके बाद भी यहां यूनिट लगाए जाने की गति बहुत धीमी है। एक सप्ताह में एक क्लस्टर की समीक्षा कर यहां यूनिट लगाने के काम में तेजी लाई जाएगी। ऐसा नहीं करने वाले आवंटियों के खिलाफ यीडा कार्यवाही करेगा।
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