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यमुना एक्सप्रेसवे पर खुद टोल वसूल सकता है यीडा

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यमुना एक्सप्रेसवे पर खुद टोल वसूल सकता है यीडा
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ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए दिल्ली आईआईटी और सुरक्षा समिति के सुझावों पर अब तक सिर्फ पांच प्रतिशत ही अमल हो पाया है। यमुना एक्सप्रेसवे पर दोनों लेन के बीच की जगह में क्रैश बैरियर ही लग सके हैं। सभी काम एक्सप्रेसवे प्रबंधन कंपनी को करने हैं। यमुना प्राधिकरण ने एस्क्रो एकाउंट खोलकर टोल का पैसा जमा करके काम कराने के लिए कहा था, लेकिन अब तक एस्क्रो भी अकाउंट भी नहीं खुला है। इसे देखते हुए अब यमुना प्राधिकरण खुद ही एक्सप्रेसवे का टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है, ताकि सुरक्षा उपायों पर काम किया जा सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यमुना एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों को रोकने के लिए यमुना प्राधिकरण ने दिल्ली आईआईटी से सुरक्षा ऑडिट कराया था। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे प्रबंधन कंपनी जेपी इंफ्राटेक से इन उपायों पर काम करने के लिए कहा। इन कामों के पहले चरण में 240 करोड़ रुपये खर्च होने थे, जिसमें से कंपनी ने अब तक एक्सप्रेसवे पर 41 पुलों (छोटे-बड़े) पर क्रैश बैरियर लगाए हैं। इसके अलावा कोई और काम नहीं कराया है। इन कामों को कराने के लिए यमुना प्राधिकरण ने एक एस्क्रो एकाउंट खोलने के लिए कहा था। यह अकाउंट यमुना प्राधिकरण व कंपनी का होगा। इसमें टोल का पैसा जमा किया जाए। इस पैसे से इन कामों को कराया जाए, लेकिन अब तक यह काम नहीं हुआ है। जबकि यमुना एक्सप्रेसवे से प्रतिदिन करीब 28 हजार वाहन गुजरते हैं। इससे हर माह करीब 28-29 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा उपायों पर सवाल पूछने पर यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि दिसंबर में यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक है, जिसमें प्रस्ताव ले जा रहे हैं कि यमुना एक्सप्रेसवे का टोल वसूलने का अधिकार खुद यीडा को दिया जाए। टोल वसूलने से मिलने वाली रकम से एक्सप्रेसवे पर सभी सुरक्षा उपायों को पूरा कराया जा सकेगा।
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आईआईटी ने दिए हैं ये सुझाव
एक्सप्रेसवे के प्रवेश व निकास द्वार और जन सुविधाओं के पास रंबल स्ट्रिप लगाई जाएं, ताकि वहां पर वाहनों की गति कम हो सके। - निकास द्वार पर क्रैश एटीन्यूटर्स लगाए जाएं। एक्सप्रेसवे से निकलते समय वाहन तेज गति में होते हैं। ऐसे में अगर वाहन अनियंत्रित होता है तो क्रश एटीन्यूटर्स गाड़ी को क्षतिग्रस्त होने से बचाएंगे।
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एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्ड की संख्या बढ़ाई जाए। इसमें स्टाप, टोल प्लाजा, जन सुविधाएं, दूरी आदि का जिक्र हो।
एक्सप्रेसवे के किनारे बैरियर को और ऊंचा उठाया जाए, ताकि बाहर से जानवर आदि ना आ सके। अभी किनारे के बैरियर छोटे हैं।
एक्सप्रेसवे पर बनाई गई लेन को खत्म किया जाए। अभी बाइक, कार, ओवरटेकिंग की लेन तय की हुई हैं।
वाहनों की गति पर नियंत्रण के लिए चालान सिस्टम को और दुरुस्त किया जाए। अभी चालान सिस्टम है, लेकिन वह बहुत प्रभावी नहीं है।
डिवाइडर की जगह फ्लस मीडियन (यह प्लेन होता है, लेकिन वाहन नहीं चलते हैं) बनाने का सुझाव दिया है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों पर एक नजर
वर्ष हादसे मौतें
2012 275 33
2013 896 148
2014 771 98
2015 919 99
2016 1219 133
2017 763 146
2018 659 111
मई 2019 तक 236 72
वर्ष 2018-19 में गुजरे वाहनों की संख्या
वाहन संख्या
कारें 65 लाख
बाइक 5.42 लाख
हल्के व्यावसायिक वाहन 6.16 लाख
बस/ट्रक 7.44 लाख
मल्टी एक्सल वाहन 3.74 लाख
यमुना एक्सप्रेसवं टोल दरें
वाहन टप्पल आगरा
कार/जीप/वैन 105 415
एलसीवी/मिनी बस 165 565
बस/ट्रक 335 1150
मल्टीएक्सल व्हीकल 515 1765
(नोट : यह टोल दरें ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट से आगरा तक प्रति वाहन रुपये में हैं।)
दिसंबर से घटेगी यमुना एक्सप्रेसवे की रफ्तार
ग्रेटर नोएडा। कोहरे में सड़क हादसे को रोकने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे की रफ्तार कम होगी। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि सर्दी में कोहरा पड़ने पर यमुना एक्सप्रेसवे की रफ्तार कम की जाएगी। वर्तमान समय में भारी वाहनों की गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटे और हल्के वाहनों की 100 किलोमीटर प्रति घंटे है। इसे घटाकर क्रमश: 60 और 80 किलोमीटर प्रति घंटे किया जाएगा। हालांकि, कोहरा पड़ने पर ही यह फैसला लिया जाएगा। अमूमन दिसंबर के अंतिम सप्ताह से कोहरा शुरू होता है।
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