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Noida News: भू-आवंटन निरस्त होने से फार्मूला-वन ट्रैक पर यीडा का अधिकार

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भू-आवंटन निरस्त होने से फार्मूला-वन ट्रैक पर यीडा का अधिकार
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मोटो जीपी बाइक रेस के आयोजन से राज्य सरकार की होगी राजस्व में हिस्सेदारी
आयोजन करने वाली कंपनी बाइक रेस के लिए यमुना प्राधिकरण से लेगी एनओसी
21 सितंबर से प्रस्तावित है तीन दिवसीय बाइक रेस का फार्मूला-वन ट्रैक पर आयोजन

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मोटो जीपी बाइक रेस के आयोजन पर जेपी समूह और यमुना प्राधिकरण के बीच अधिकार को लेकर विवाद होने लगा है। जेपी बाइक रेस कराने वाली कंपनी से हिस्सेदारी के लिए लगातार दबाव डाल रहा है, जबकि प्राधिकरण ने रेस का आयोजन कराने वाली कंपनी को पत्र लिखकर कहा है कि इस ट्रैक पर प्राधिकरण का कब्जा है। आयोजन से जो भी राजस्व मिलेगा वह प्रदेश सरकार को जाएगा। उधर, आयोजन कराने वाली कंपनी अगले सप्ताह यमुना प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करेगी।
फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स और द्रोणा कंपनी ने 21 सितंबर से तीन दिवसीय रेस ‘ग्रां प्री ऑफ भारत’ का आयोजन फार्मूला-वन ट्रैक पर आयोजन कराने के लिए कार्यक्रम घोषित कर दिया है। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के भूखंड का आवंटन यमुना प्राधिकरण ने पहले ही निरस्त करके उस पर कब्जा कर लिया है, मगर इसके बावजूद जेपी की ओर से मोटो जीपी का आयोजन कराने वाली कंपनी से रेवन्यू शेयरिंग के लिए करार करने का दबाव बना रही है। जब इसकी जानकारी यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों को मिली तो उन्होंने फेयरस्ट्रीट स्पोटर्स कंपनी को पत्र लिखकर कहा है कि फार्मूला-वन ट्रैक पर प्राधिकरण का कब्जा है। इसका आवंटन निरस्त किया जा चुका है। अदालत से कोई स्थगन आदेश नहीं है, इसलिए जेपी से कंपनी कोई करार न करें। इसके लिए कंपनी ने पहले ही निवेश सम्मेलन में यूपी सरकार से करार कर रखा है। जहां तक रेवन्यू शेयरिंग की बात है तो यीडा चाहता है कि इस आयोजन से जो राजस्व मिले वह सरकार के हिस्से में जाए। इस राजस्व पर जेपी का कोई अधिकार नहीं है।
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प्राधिकरण ने पूर्व में जेपी के फार्मूला-वन ट्रैक का बकायेदारी के कारण भू-आवंटन निरस्त कर दिया था। इस पर प्राधिकरण ने ताला लगाकर कब्जा ले लिया था। अदालत से स्थगन आदेश नहीं है और पूरी तरह अधिकार यमुना प्राधिकरण का है। इससे जो राजस्व मिले वह राज्य सरकार को जाएगा, इसमें जेपी का कोई हिस्सा नहीं बनता है। इसकी जानकारी रेस कराने वाली कंपनी को भी दे दी है। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण
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