ब्रेक डाउन पर मुआवजे का दावा कर सकते हैं उद्योग: राज प्रताप सिंह
-एनपीसीएल ने विद्युत दरों में बढ़ोतरी न करने का लिया फैसला, पीवीवीएनएल ने 18 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग रखी
-प्रदेश विद्युत नियामक बोर्ड के सामने एओए ने मल्टी प्वाइंट कनेक्शन और किसानों ने डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने की मांग रखी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने जिले में बिजली दर, मल्टी पॉइंट कनेक्शन, स्मार्ट मीटर के अधिक चार्ज व टैरिफ को लेकर आ रही परेशानियों को हल करने की मांग रखी। इस दौरान एनपीसीएल ने आगे विद्युत दरों को न बढ़ाने की योजना पेश की। पीवीवीएनएल ने विद्युत दरों में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने की रिपोर्ट रखी। दूसरी तरफ, उद्योगों के द्वारा ब्रेक डाउन की समस्या से क्षति होने की बात उठाने पर नियामक आयोग ने उनसे क्षति के मुआवजे के लिए दावा करने के लिए भी कहा है।
नोएडा पावर कारपोरेशन और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारियों ने आयोग के चेयरमैन राज प्रताप सिंह, सदस्य कानून वीके श्रीवास्तव, टेक्निकल सदस्य संजय कुमार सिंह, सचिव शैलेंद्र गौर, निदेशक टैरिफ अमित भार्गव के सामने वर्ष 2023 व 2024 की वार्षिक रिपोर्ट पेश की। इसके अलावा विद्युत दर बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई। जन सुनवाई में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों ने विद्युत दरों में बढ़ोत्तरी, स्मार्ट मीटर के दाम अधिक लेने, सिंगल पॉइंट से मल्टी पॉइंट के मुद्दे पर चर्चा की। डीएमआरसी के अधिकारियों ने भी टैरिफ की दर को कम करने की मांग की।
उपभोक्ता सिद्धार्थ शेखर ने मल्टी पॉइंट कनेक्शन की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में सिंगल पॉइंट कनेक्शन को मल्टी पॉइंट कनेक्शन में तब्दील करने के लिए 50 फीसदी लोगों की सहमति मांगी गई थी। आज के समय में मल्टी पॉइंट मुद्दे में अधिक खर्च आने की वजह निवासी इसको लगाने से इंकार कर रहे हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया पर कुछ बेहतर करने के लिए मांग रखी। इस मौके पर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) एमडी चैत्रा वी और नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) एमडी पीआर कुमार भी उपस्थित रहे।
-
15 मई के बाद से डीजल जनरेटर पर रोक:
ग्रेटर नोएडा इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के चेयरमैन जेएस राणा ने 15 मई से डीजल से चलाने वाले डीजी पर रोक के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि दावा किया जाता है कि कि 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति होती है, लेकिन हकीकत यह है कि 24 में तीन से चार बार कुल 30 से 35 मिनट का पावर कट होने से उद्योगों में ब्रेक डाउन की स्थिति होती है। उन्होंने एनपीसीएल से पावर कट की संख्या को दुरुस्त करने की मांग रखी। इस मसले पर बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि उद्योगों को ब्रेक डाउन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए दावा किया जा सकता है।
दिल्ली की बिजली दरों लागू की जाएं
ग्रेटर नोएडा फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। साथ ही दिल्ली की तर्ज पर ग्रेटर नोएडा में भी सामान बिजली दर करने के लिए मांग की है। फेडरेशन के अध्यक्ष देवेंद्र टाइगर और महासचिव दीपक भाटी ने बताया कि एनपीसीएल के द्वारा अधिक दामों पर बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि दिल्ली में बिजली दर कम है।
-
तकनीक पर जोर दे पीवीवीएनएल
नोएडा सेक्टर-108 स्थित एक सोसाइटी निवासी उपभोक्ता पंकज कुमार राय ने बताया कि फ्लैट में मीटर लगाने के लिए 22 हजार रुपये लिए गए। जबकि कुछ वर्ष पहले सिंगल प्वाइंट के लिए भी 4 से 5 हजार रुपये लिए जाते थे। उन्होंने बताया कि पहली बार रिचार्ज के लिए भी उन्हें सोसाइटी के मेंटेनेंस दफ्तर जाना पड़ा था। आजकल तकनीक इतनी आगे बढ़ गई है, लेकिन रिचार्ज के लिए कोई सुविधा व्यवस्थित नहीं हैं।
-
डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने की मांग
जनसुनवाई में बीकेयू लोक शक्ति के अध्यक्ष ओम दत्त चौहान ने कहा कि यूपीपीसीएल के द्वारा डूब एरिया में खेत होने का हवाला देते हुए किसानों को बिजली कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं, इससे सिंचाई के लिए वे अपने ट्यूबवेल का प्रयोग करने में असमर्थ हैं। दूसरी जगह से आपूर्ति लेने को मजबूर हैं। इसके अलावा उन्होंने गलत बिलों का भी मुद्दा उठाया। दावा किया कि एक किसान को कनेक्शन नहीं दिया गया, लेकिन उसे लाखों का बिजली बिल दे दिया गया। इधर उत्तर प्रदेश पावर कंज्यूमर एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि एनपीसीएल की तरह पीवीवीएलएन भी उपभोक्ताओं को बिजली दरों में छूट दे।