यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा ने बिना अनुमति भूखंड आवंटित किए हैं। जिसकी वजह से खरीद में देरी होने से 188.64 करोड़ का नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश की विधानसबा में एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की नियोजन, भूमि अर्जन, भूमि के विकास और परिसम्पत्तियों के निर्माण, मूल्य निर्धारण तथा आवंटन में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) को कई कमियां मिली है। जमीन खरीदने में देरी की वजह से यीडा को 188.64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को विधानसभा में प्रस्तुत की गई।
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कैग रिपोर्ट में बताया गया कि यीडा ने क्षेत्रीय योजना 2021 में 2008-09 से कृषि क्षेत्र का अर्जन, विकास और निर्माण गतिविधियां शुरू की थी। इसमें बिना भू उपयोग तय हुए ही जमीनों का आवंटन शुरू कर दिया।
इसके कारण विकास गतिविधियां एनसीआरपीबी के अनुमोदन व क्षेत्रीय योजना 2021 की भू उपयोग योजना के अनुसार नहीं है। इतना ही नहीं, महायोजना (चरण-1) 2031 को बिना अनुमोदन ही कार्यान्वित भी कर दिया। सरकार के अनुमोदन के बिना ही भू उपयोग में परिवर्तन और भूखंड तक आवंटित कर दिए थे।