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Noida News: यमुना की बाढ़ दे गई मानसिक व शारीरिक चोट

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-200 से अधिक लोगों को किया गया उपचार, बच्चों की संख्या अधिक
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-आई फ्लू के मामले सामने आए, महिलाओं और बुजुर्ग की संख्या अधिक

-फंगल इंफेक्शन, सांस में संबंधी दिक्कत व एलर्जी के मरीज भी आ रहे

प्रशांत चौहान
पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार पल्ला क्षेत्र में आई बाढ़ ने दिल्ली वालों को मानसिक के साथ शारीरिक चोट भी पहुंचाई है। अपने आशियाने के साथ जमा-पूंजी बचाने के दौरान लगी चोटें शायद ही वह कभी भुला पाएं। यही नहीं, यमुना नदी के उफान ने न केवल लोगों के घर उजाड़े, बल्कि उनकी सेहत पर भी गहरा असर डाला है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बने राहत शिविरों में चोटिल और बीमार लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
शनिवार को विभिन्न राहत शिविरों में 200 से अधिक लोगों का इलाज किया गया, जिनमें बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा रही। ऐसे में जो सरकारी और निजी संस्थाएं कभी इन लोगों तक पहुंचती भी नहीं पाती थीं, मौजूदा समय में वह उनकी इन घावों को भरने का प्रयास कर रहीं हैं। इसके लिए संस्थाएं शिविरों में मेडिकल कैंप लगाकर सेवाएं दे रही हैं। कैंपों में मौजूद डॉक्टरों के अनुसार कैंप में गंभीर चोटें लगने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। बाढ़ के पानी में डूबने, फिसलने और मलबे से चोटिल होने के कई मामले सामने आए हैं। डॉ. प्रिंस ने बताया कि राहत शिविर में शनिवार को ही 200 से अधिक लोग कैंप में चिकित्सा सुविधा लेने पहुंचे। इनमें बच्चों और पुरुषों में ज्यादातर हाथों में गहरे कट, सिर पर चोट और पैरों में गंभीर घाव जैसी दिक्कतें देखने को मिलीं।
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त्वचा और आंखों के संक्रमण के मामले बढ़ रहे

मयूर विहार के एक राहत शिविर में मेडिकल सेवाएं दे रहे ट्रेनी डॉक्टर रेपॉन रॉय ने बताया कि पानी के संपर्क में आने से त्वचा और आंखों के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों में बुखार और एलर्जी के मामले भी चिंता का विषय बने हुए हैं। वहीं, महिलाओं और बुजुर्गों में एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, आंखों में जलन, त्वचा संबंधी संक्रमण, तेज खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी बीमारियां देखने को मिलीं।
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डॉक्टरों और मरीजों से बातचीत

कैंप में सभी प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए नियमित जांच और दवाओं का वितरण हो रहा है।
- प्रिंस मिश्रा, ट्रेनी डॉक्टर


कैंप सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक चलता है, जिसमें लोगों को दवाएं और अन्य तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं।
- अनुज कुमार सिंह, ट्रेनी डॉक्टर

बाढ़ में गाय फंस गई थी, जिसे निकालने में घुटनों में चोट लग गई। इसके बाद कैंप में ही घाव की पट्टियां करा रहा हूं।
- आविद अली, बाढ़ पीड़ित

बाढ़ के बाद घर से सामान निकालने-निकालते शरीर दुखने लगा था। इसके लिए कैंप से दवा ली थी, जिससे अब आराम है।
- पिंकी, बाढ़ पीड़ित
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