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विश्व फेफड़ा दिवस : धूम्रपान बन रहा फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण

Thu, 25 Sep 2025 02:35 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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कुरुक्षेत्र। प्रत्येक वर्ष आज के दिन विश्व फेफड़ा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और वायु प्रदूषण से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष इस दिवस की थीम स्वस्थ फेफड़े, स्वस्थ जीवन है। यह थीम फेफड़ों के स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करती है, जो एक स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। फोरम ऑफ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटी के नेतृत्व में यह पहल विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रासंगिक है, जहां जनसंख्या घनत्व और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के कारण फेफड़ों की बीमारियों का बोझ अधिक है।
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एक शोध के अनुसार धूम्रपान फेफड़ों की बीमारियों, विशेषकर फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 1.8 मिलियन लोगों की जान लेता है। फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 80 प्रतिशत मौतें धूम्रपान से जुड़ी हैं। इसके अलावा घर के अंदर और बाहर का वायु प्रदूषण भी फेफड़ों के लिए घातक है। जिला नागरिक अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र शैली बताते हैं कि वेंटिलेशन वाली जगहों पर हवा में 100 गुना अधिक सूक्ष्म कण हो सकते हैं, जो निमोनिया, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। इनडोर प्रदूषण से आंखों, नाक और गले में जलन, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
विश्व की 99 प्रतिशत आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि विश्व की 99 प्रतिशत आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो इसके दिशा-निर्देशों से अधिक प्रदूषित है। यह समस्या निम्न और मध्यम आय वाले देशों में विशेष रूप से गंभीर है। जलवायु परिवर्तन के कारण जंगल की आग, धूल के तूफान, और स्थिर वायु द्रव्यमान जैसे कारक प्रदूषण को और बढ़ाते हैं, जिससे फेफड़ों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ता है। दिल्ली एनसीआर व प्रदेश में भी वाहनों की बढ़ती संख्या में आस-पास का वातावरण धुएं का गुबार बन चुका हैं। इसके चलते बच्चों में निमोनिया नवजात अवधि के बाद मृत्यु का प्रमुख कारण है। वह तपेदिक (टीबी) भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
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धूम्रपान का फेफड़ों पर प्रभाव
धूम्रपान फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे बलगम का उत्पादन बढ़ता है और सिलिया ( फेफड़ों को साफ करने वाले सूक्ष्म बाल) कमजोर हो जाते हैं। इससे फेफड़ों की स्व-सफाई प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे खांसी, संक्रमण, और दीर्घकालिक बीमारियां जैसे वातस्फीति का खतरा बढ़ता है। तंबाकू का धुआं न केवल धूम्रपान करने वालों, बल्कि उनके आसपास के लोगों, विशेषकर बच्चों और अजन्मे शिशुओं के फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है।
धूम्रपान से दूरी व नियमित व्यायाम फेफड़ों के लिए जरूरी : डाॅ. शैली
जिला नागरिक अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र शैली का सुझाव है कि धूम्रपान छोड़ना, तंबाकू के धुएं से बचना, नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, और टीकाकरण फेफड़ों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं। घर और कार्यस्थल पर उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करना, प्रदूषण के संपर्क को कम करना, और नियमित स्वास्थ्य जांच भी आवश्यक है।
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